उत्तर प्रदेश को कुष्ठ-मुक्त बनाने के लिए 5 वर्षीय कार्ययोजना, राज्यस्तरीय सम्मेलन में ‘लखनऊ डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर
स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह बोले- 'सरकार प्रतिबद्ध'

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में कुष्ठ रोग के नए मामलों की त्वरित पहचान, संक्रमण की रोकथाम, दिव्यांगता में कमी और प्रभावित व्यक्तियों को समाज में सम्मानजनक जीवन दिलाने के उद्देश्य से एक वृहद पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत उच्च प्राथमिकता वाले जिलों व ब्लॉकों की पहचान कर स्वास्थ्यकर्मियों का विशेष प्रशिक्षण कराया जाएगा और प्रभावित लोगों को सभी आवश्यक स्वास्थ्य व सामाजिक सेवाओं से जोड़ा जाएगा।
इस महत्वपूर्ण रणनीति को आकार देने के लिए लखनऊ के होटल ताज महल में दो दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, आईएलईपी इंडिया, निप्पोन फाउंडेशन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं ने कुष्ठ उन्मूलन की भावी रणनीतियों पर गहन मंथन किया।
स्वास्थ्य मंत्री ने जताया संकल्प
सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्य स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) वी. हेकाली झिमोमी और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष योहेई सासाकावा ने किया। स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार किए हैं, जिससे जेई जैसी बीमारी पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार कुष्ठ रोग को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, बीमारी से जुड़ा सामाजिक कलंक आज भी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार डब्ल्यूएचओ और सासाकावा फाउंडेशन के साथ मिलकर काम करेगी।
‘लखनऊ डिक्लेरेशन’ पर बने हस्ताक्षरकर्ता
सम्मेलन के दौरान उपस्थित सभी वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिभागियों ने कुष्ठ उन्मूलन के प्रति संकल्पबद्धता दर्शाते हुए ‘लखनऊ डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर किए।
97% उपचार दर और नई रणनीति
राज्य कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जया देहलवी ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 91,783 नए मामले सामने आए हैं, जबकि उपचार पूर्ण करने की दर 97 प्रतिशत से अधिक रही है। संक्रमण रोकने के लिए मरीजों के करीबी संपर्कों को रिफैम्पिसिन की सिंगल डोज दी जा रही है। साथ ही दिव्यांग व्यक्तियों को पेंशन, विशेष चप्पलें, घाव की देखभाल और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।
सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष योहेई सासाकावा और वर्चुअल माध्यम से जुड़े डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि डॉ. इवान जे.-एफ. हुटिन ने कहा कि कुष्ठ रोग केवल चिकित्सीय समस्या नहीं बल्कि मानवाधिकारों और सामाजिक भेदभाव से जुड़ा विषय भी है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुष्ठ रोग की प्रसार दर प्रति 10,000 आबादी पर 0.34 है, जो सराहनीय है, लेकिन छिपे हुए मामलों को खोजना अब भी प्रमुख प्राथमिकता है। इस सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के आधार पर आगामी पांच वर्षों के लिए समयबद्ध रोडमैप लागू किया जाएगा।




