जानिये ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए राज्यसभा समिति ने क्या सिफारिशें की हैं?


DECEMBER 24, 2020
संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. सहस्रबुद्धे के नेतृत्व में उपराष्ट्रपति को सौंपी गई रिपोर्ट
शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय समिति ने की हैं ये सिफारिशें
नई दिल्ली (वि.)। गुरुवार को राज्यसभा सांसद डॉ. विनय पी. सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने राज्यसभा के सभापति एम. वेंकेया नायडू को 2021 के ओलंपिक खेल की तैयारी के संबंध में अपना 317वां प्रतिवेदन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सौंपा।

(रिपोर्ट के संबंध में राज्यसभा के उपसभापति एम. वेंकैया नायडू को जानकारी देते डॉ. विनय पी. सहस्रबुद्धे। साथ में ज्योतिरादित्य सिंधिया। फोटो-राज्यसभा सचिवालय।)
इस पैनल ने कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई अभूतपूर्व स्थिति के विभिन्न पहलुओं और खिलाड़ियों, कोचों, सहायक कर्मचारियों की तैयारियों के विभिन्न पहलुओं, संरचना आदि पर इसके प्रभाव की जांच की। इसके सदस्यों ने वर्ष भर में 5 बैठकें करके इस मुद्दे पर गहन चर्चा की। पैनल ने खेल विभाग के प्रतिनिधियों और भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक, राष्ट्रीय उच्च वरीयता वाले खेल परिसंघों, वरिष्ठ खेल पत्रकारों एवं प्रतिष्ठित खिलाड़ियों तथा पूर्व ओलंपियनों के साथ इस विषय पर चर्चा की।
समिति ने संसद सदस्य ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के संयोजकत्व में तीन सदस्यीय उप समिति का गठन किया ताकि बैठकों में आए सुझावों का विश्लेषण करके एक वृहद प्रतिवेदन तैयार किया जा सके। इसमें आगामी ओलंपिक खेलों में भारत के पदकों की संख्या बढ़ाने हेतु खाका तैयार करने के लिए अल्प, मध्यम और दीर्घकालिक कार्रवाई योजना बनाने की सिफारिश की गई है।
उप समिति ने अपना प्रारूप प्रतिवेदन मुख्य समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। उप समिति द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन को समिति द्वारा 23 दिसम्बर, 2020 को स्वीकार किया गया। इस प्रतिवेदन में समिति द्वारा ये प्रमुख सिफारिशें की गई हैं-
-ओलंपिक खेलों की तैयारी के लिए खिलाड़ियों की क्षमताओं, कमजोरियों, अवसरों और जोखिम का पता लगाने के लिए सभी खिलाड़ियों का मनोवैज्ञानिक, मानसिक और पोषण संबंधी मूल्यांकन करवाया जाए।
-खिलाड़ियों के लिए गहन कार्डियो पल्मनरी फंक्शन जांच करवाना अनिवार्य किया जाए।
-वैज्ञानिक मस्क्यूलो स्केलेटल रिहैब की व्यवस्था करना जिससे कि अचानक दबाव के कारण, विशेषकर दूरदराज के केन्द्रों पर यदि खिलाड़ी मुख्य केन्द्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर रहें है, चोट से बचा जा सके।
-मूल्यांकन रिपोर्ट कार्ड के परिणामों के अनुसार खिलाड़ियों को सहायता और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
-ओलंपिक के लिए अर्हताप्राप्त खिलाड़ियों के लिए उन प्रशिक्षण केंद्रों, स्टेडियमों और खेल केन्द्रों की पहचान करना, जिन्हें अभी खोला नहीं गया है। इन केन्द्रों को शीघ्रातिशीघ्र खोलने के साथ खिलाड़ियों को ऐसे वैकल्पिक केन्द्रों में भेजा जाए, जो खुल चुके हैं।
-फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों से, जो अपने देश में ही प्रतिस्पर्धाएं आयोजित करते हैं, अधिक चैंपियन निकलते हैं। भारत को इसी तर्ज पर अधिकाधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं की मेजबानी करनी चाहिए ताकि ज्यादा प्वाइंट हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को कम यात्रा करनी पडे और उनकी रैंकिंग ऊपर पहुंच सकें। भारत विदेशी प्रतिस्पर्धाओं में खिलाड़ियों को भेजने के लिए जो राशि खर्च करता है, उसी राशि से कई खिलाड़ी लाभान्वित हो सकते हैं।
-घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं के बंद होने के कारण खिलाड़ियों को आलंपिक 2021 की तैयारी हेतु पर्याप्त प्रतियोगिताओं का अनुभव नहीं मिल पाया है। इसकी जरूरत कुश्ती, बैडमिंटन जैसे खेलों में बहुत अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे में अर्हताप्राप्त खिलाड़ियों को आवश्यक अनुभव प्राप्त कराने के लिए प्रतिस्पर्धात्मक मैचअप की पहचान कर उनका आयोजन किया जाए।
–प्रशिक्षण केंद्रों में बायो-बबल सृजित करना ताकि खिलाड़ियों को सुरक्षित वातावरण में आइसोलेट किया जा सके और वे संक्रमण की न्यूनतम संभावना के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इसके अलावा ओलंपिक शुरू होने से पहले एथलीटों और खिलाड़ियों की विदेशी खेल प्रतिस्पर्धाओं में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बायो-बबल का उपयोग करना।
–सरकार को वित्तीय अनुदानों, उपकरण, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में प्रतिनिधित्व आदि के संबंध में निर्णय लेने और अनुमोदन प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए ताकि अनावश्यक देरी से बचा जा सके।
–ओलंपिक दल के संभावित सदस्यों की अर्हता और चयन प्रक्रिया समय पर पूरी की जानी चाहिए। चयन कार्यक्रम काफी समय पहले घोषित कर दिया जाना चाहिए और समय-सारणी का पालन किया जाना चाहिए।
-महामारी के दौरान कई विदेशी कोच त्यागपत्र देकर अपने अपने देश वापस चले गए। इसके अलावा, कई खेल विधाओं में विदेशी खेल विशेषज्ञ 65 या उससे अधिक आयु के हैं। 65 वर्ष से अधिक आयु के कोच को उनके एनएसएफ द्वारा प्रशिक्षण केन्द्रों में न जाने दिया जाए।
-इसके अलावा प्रशिक्षकों के 561 रिक्त पदों पर नियुक्ति करने के अतिरिक्त विभिन्न एनएसएफ के तालमेल से एक तत्काल सर्वेक्षण कराने और जिन प्रशिक्षण उपकरणों की कमी है, उनके लिए समन्वयन और शीघ्र खरीद के लिए अधिकारी की नियुक्ति करने जैसी सिफारिशें की गई हैं।
वीडियो कांफ्रेंसिंग में डॉ. सहस्रबुद्धे, ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा राज्यसभा के महासचिव देशदीपक वर्मा, ज्वाइंट सेक्रेटरी और राज्यसभा की वित्तीय सलाहकार डॉ. शिखा दरबारी आदि प्रमुख रूप से मौजूद थे। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने इस मौके पर समिति के अध्यक्ष डॉ. सहस्रबुद्धे, सदस्यों और राज्यसभा सचिवालय के अफसरों को बधाई दी।
