उत्तर प्रदेश

बाराबंकी: आठवें वेतन आयोग में संशोधन की मांग, सेवानिवृत्त कर्मचारियों का विशाल धरना

Lucknow Focus News Desk: बाराबंकी में सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स संगठन ने आठवें वेतन आयोग में संशोधन की मांग को लेकर गन्ना संस्थान कार्यालय परिसर में एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कर्मचारी-शिक्षक विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस धरने में शिक्षक महासंघ के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

प्रमुख मांगें और विरोध के कारण

संगठन लंबे समय से सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हुई है। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं।

पेंशन पुनरीक्षण: 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों और शिक्षकों के पेंशन पुनरीक्षण और पेंशनरी लाभों को आठवें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) में शामिल किया जाए।
वित्त विधेयक 2025 में संशोधन: सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर भेदभाव करने वाले अंश को हटाया जाए।

पेंशन की प्रकृति: पेंशन को गैर-अंशदायी और गैर-वित्त पोषित बताने वाले प्रावधानों को हटाया जाए।

राशिकरण कटौती: पेंशन के राशिकरण की कटौती की अवधि को 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष किया जाए।

नेताओं का संबोधन और आक्रोश

सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बाबूलाल वर्मा ने कहा कि वेतन आयोग के इतिहास में यह पहला मौका है जब पुराने पेंशनभोगियों को आयोग की परिधि से बाहर कर दिया गया है, जिससे पेंशन समाज में घोर निराशा और आक्रोश है। उन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कहते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप कर समस्या का निदान करने की अपील की।

माध्यमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष एसपी सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2024 से पूर्व से मिल रही पेंशन व्यवस्था ही लागू रहनी चाहिए और इसके लिए वे सड़क से संसद तक लड़ने को तैयार हैं।

ज्ञापन सौंपा गया

धरना सभा के अंत में, प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिसे जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नायब तहसीलदार आशुतोष उपाध्याय को सौंपा गया। सभा को प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष पवन कुमार वर्मा सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।

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