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सिने टाकीज में दिखा भारत, प्रकृति का बालक!

– मनोज कृष्ण
मुंबई (लखनऊ फोकस)। देश की मां के रूप में सम्मान और उपासना की परंपरा हमारी संस्कृति का हिस्सा रही है.मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने भी मातृभूमि को स्वर्ग से महान कहा है-‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’.
सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधताओं से भरे इस पावन भूमि को आर्यों ने आर्यावर्त, मनीषियों ने भारतवर्ष, अरबों ने हिंदुस्तान और यूनानियों ने इंडिया नाम दिया. अटक से कटक, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैली भारतीय संस्कृति का मूल आध्यात्म है. आध्यात्म का प्राण योग और योग की शक्ति प्रकृति को माना गया है. इस चेतना को देश के कोने-कोने में महसूस किया जा सकता है. आध्यात्म की इसी गूढ़ चेतना को संजीवनी बनाकर मां भारती को जीवंत स्वरूप में,’भारत, प्रकृति का बालक’ डॉक्यूमेंटरी फ़िल्म में दिखाया गया. इसके निर्देशक डॉक्टर दीपिका कोठारी और श्री राम जी ओम हैं.
ध्यान रहे, संस्कार भारती के तत्त्वावधान में हर महीने के आखिरी शनिवार को ‘सिने टाकीज- सिने सृष्टि भारतीय दृष्टि’ का आयोजन होता है. इस बार ये कार्यक्रम 28जनवरी को मुंबई के अंधेरी ईस्ट में आयोजित हुआ.कार्यक्रम की शुरुआत गणमान्य अतिथियों के हाथों दीप प्रज्जवलन से हुआ.
भारत, प्रकृति का बालक! फ़िल्म में भारत देश की कल्पना प्रकृति की संतान के रूप में की गई है. विषय के चयन और फ़िल्म निर्माण से जुड़ी चुनौतियों के बारे में बताते हुए निर्देशक श्री रामजी ओम ने बताया कि छह साल की रिसर्च और महीनों की शूटिंग के बाद इसे साकार किया जा सका. फ़िल्म का रिसर्च डॉक्टर कोठारी ने किया. इसके लिए उन्होंने वैदिक संहिताओं से लेकर तमाम प्राचीन ग्रंथों को आधार बनाया. बकौल रामजी ओम-” हमने इस फ़िल्म को बनाकर कोई नया काम नहीं किया, बल्कि आदि शंकर,वासुदेव शरण अग्रवाल, महर्षि अरविन्द, दयानंद भार्गव, नागास्वामी जैसे तमाम विद्वान, ऋषियों-मनिषियों की दृष्टि को ही चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया.”
फ़िल्म के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में डॉक्टर दीपिका ने बताया – ‘इसके निर्माण के पीछे का उद्देश्य देश के प्राकृतिक सांस्कृतिक महत्त्व को सामने लाना है. ताकि नई पीढ़ी उन मूल्यों और विरासत को सहेज सके, जो आज आधुनिकता की चकाचौंध और भौतिकता की अंधी दौड़ में खोते जा रहे हैं’.
इससे पहले निर्देशक द्वय, ‘योग का इतिहास’ समेत बीस से ज्यादा डॉक्यूमेंटरी का निर्माण कर चुके हैं. इसकी बनाई फिल्मों की सराहना देश ही नहीं विदेशों में भी होती है. बताते चलें,श्री रामजी ओम सिविल सेवा के तहत भारतीय रेल में वरिष्ठ वित्त सलाहकार और दीपिका जी भौतिक विज्ञान में पीएचडी हैं.
कार्यक्रम का संचालन लेखक-निर्देशक ज्योति जेलिया ने किया. कार्यक्रम के समापन पर सिने टाकीज की ओर से अरुण शेखर ने आमंत्रित अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया. इस दौरान वरिष्ठ रंग निर्देशक और सिने कलाकार नंद किशोर पंत, संस्कार भारती के वरिष्ठ सदस्य सुरेन्द्र कुलकर्णी और कोकण प्रान्त के वरीय पदाधिकारी शेखर अभ्यंकर की विशेष उपस्थिति रही. कार्यक्रम के व्यवस्था का प्रभार श्वेता ठाकुर और शुभांग गुप्ता ने संभाला.



