यूपी में सुरक्षित प्रसव के लिए सरकार का बड़ा कदम: सीटीजी मशीन से होगी भ्रूण की सटीक निगरानी

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए योगी सरकार अब तकनीकी आधुनिकता का सहारा ले रही है। प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और मेडिकल कॉलेजों में कार्डियोटोकोग्राफी (सीटीजी) मशीन के नियमित उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने इसे गेमचेंजर बताते हुए कहा कि इससे प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को समय रहते पहचान कर जच्चा-बच्चा की जान बचाई जा सकेगी।
क्या है सीटीजी तकनीक और इसके फायदे?
कार्डियोटोकोग्राफी (CTG) एक सुरक्षित और प्रभावी डायग्नोस्टिक तकनीक है। इसका उपयोग गर्भावस्था की तीसरी तिमाही और प्रसव के दौरान अजन्मे शिशु की हृदय गति और गर्भाशय के संकुचन को मापने के लिए किया जाता है। यह मशीन शिशु के स्वास्थ्य का सटीक आकलन करती है, जिससे संभावित खतरों की पहचान कर डॉक्टर तुरंत उचित निर्णय ले सकते हैं।
डॉक्टरों और नर्सों को दिया जा रहा है विशेष प्रशिक्षण
क्वीन मैरी अस्पताल के सभागार में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के 20 मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है। गुरुवार को गोरखपुर, आजमगढ़, जालौन, बदायूं और अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के दूसरे बैच ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
एआई (AI) का उपयोग: केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने क्लीनिकल सटीकता बढ़ाने के लिए AI-सक्षम (Artificial Intelligence) मशीनों को अपनाने पर जोर दिया।
क्लीनिकल अनुभव: डॉ. पिंकी जोवेल ने प्रशिक्षुओं को याद दिलाया कि मशीनी रिपोर्ट के साथ-साथ डॉक्टरों का अपना क्लीनिकल अनुभव और शारीरिक जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
एसडीजी लक्ष्यों की प्राप्ति की ओर कदम
प्रदेश में 60 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं सीएचसी पर सेवाएं लेती हैं। डॉ. पिंकी ने बताया कि यदि सीएचसी स्तर पर सीटीजी का सफल उपयोग शुरू हो जाए, तो उत्तर प्रदेश सतत विकास लक्ष्यों (SDG) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण सफलता हासिल करेगा।
प्रशिक्षण का अगला चरण
अब तक आरएमएल लखनऊ, कानपुर, बांदा, बरेली और नोएडा जैसे कॉलेजों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षण का तीसरा और अंतिम चरण 21 अप्रैल को आयोजित होगा, जिसमें शेष संस्थानों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।




