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शेयर बाजार में कोहराम! सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा फिसला, कच्चे तेल में उबाल ने बढ़ाई टेंशन

Lucknow Focus News Desk: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों ने रक्षात्मक रुख अपना लिया है। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान के साथ निचले स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं।

बाजार का ताजा हाल: प्रमुख सूचकांकों में गिरावट

शुक्रवार को शुरुआती सत्र में भारतीय बाजारों ने कमजोरी के साथ शुरुआत की।

सेंसेक्स: 30 शेयरों वाला बीएसई (BSE) सेंसेक्स 536.66 अंक गिरकर 77,331.75 के स्तर पर आ गया।

निफ्टी: 50 शेयरों वाला एनएसई (NSE) निफ्टी 166.95 अंक की गिरावट के साथ 24,170.80 पर कारोबार कर रहा है।

रुपया: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया भी 36 पैसे कमजोर होकर 94.58 के स्तर पर पहुंच गया है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

गिरावट के 4 बड़े कारण

भू-राजनीतिक तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका और ईरान के बीच हुई गोलीबारी ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को सैन्य टकराव की आशंका सता रही है।

कच्चे तेल में उबाल: ब्रेंट क्रूड 1.19% बढ़कर 101.3 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति (Inflation) के लिए नकारात्मक हैं।

विदेशी फंडों की निकासी: आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने गुरुवार को 340.89 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर बाजार से हाथ खींचा है।

बैंकिंग शेयरों में दबाव: एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े दिग्गजों में बिकवाली से बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ा है।

टॉप गेनर्स और लूजर्स

पिछड़ने वाले शेयर: महिंद्रा एंड महिंद्रा, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस और टाटा स्टील में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।

बढ़त वाले शेयर: इस गिरावट के बावजूद एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, अदानी पोर्ट्स और एचसीएल टेक जैसे शेयरों में खरीदारी दिख रही है।

विशेषज्ञों की राय

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, “मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण बाजार समाचारों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना रहेगा। सैन्य और राजनयिक विरोधाभासों ने निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) कम कर दी है।”

वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव घटाने और बढ़ाने का नाटक जारी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं और इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर साफ दिख रहा है।

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