अगर आपने बचपन में जेमिनी और जंबो सर्कस देखा है तो इसे जरूर पढ़ें


जैमिनी और जंबो सर्कस के संस्थापक जैमिनी संकरन का निधन

लखनऊ फोकस एक्सक्लूसिव
तिरुअनंतपुरम। क्या आपने अपने बचपन में जेमिनी या जंबो सर्कस देखा है? जरूर देखा होगा। उसके कुछ दृश्य आपके मानस पटल पर अंकित भी होंगे। अगर बहुत कम उम्र में देखा होगा तब भी उसकी धुंधली-सी याद जेहन में जरूर होगी। राजकपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर अगर आपने देखी होगी, तो भी जेमिनी सर्कस की याद आपको होगी। इसकी चर्चा आज हम यहां इसलिए कर रहे हैं कि लगातार 79 वर्षों तक सर्कस के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करने वाले जेमिनी संकरन का बीते रविवार को देर रात निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे। उनका निधन केरल के कुन्नूर के एक अस्पताल में हुआ।
जेमिनी संकरन का वास्तविक नाम एम.वी. संकरन था। पहले उन्होंने कई सर्कसों में काम किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान कुछ दिनों तक भारतीय सेना में भी रहे। 1951 में उन्होंने विजया सर्कस को 6000 रुपये में खरीदा और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। बाद में उन्होंने विजया सर्कस का नाम जेमिनी सर्कस कर दिया। इसके कई बरसों बाद जंबो सर्कस की भी स्थापना की। लोग प्यार से उन्हें जेमिनी कहते थे। धीरे-धीरे जेमिनी संकरन उनका नाम ही पड़ गया।
सर्कस का नाम उन्होंने जेमिनी इसलिए रखा था कि जेमिनी को वह अपने लिए शुभ मानते थे क्योंकि उनकी राशि जेमिनी (मिथुन) ही थी। धीरे-धीरे वह एक बड़े सर्कस एन्ट्रेप्रेन्योर के तौर पर स्थापित होते चले गए। जेमिनी सर्कस में जिन के. सहदेवन को उन्होंने अपना पार्टनर बनाया था, क्योंकि उस समय उनके पार दो शेर, एक हाथी और सर्कस में उपयोग होने वाले कई सारे तंबू-कनात थे, बाद में वह इस बिजनेस से अलग हो गए।
राजकपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर, जो कि सुपर-डुपर हिट रही थी, की शूटिंग जेमिनी सर्कस में ही हुई थी। जिसमें राजकपूर ने खुद एक सर्कस कलाकार का रोल किया था। इससे जेमिनी सर्कस का नाम घर-घर में पहुंच गया। यही कारण था कि जेमिनी सर्कस जिस भी शहर में लगता, उसे देखने के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ आती। इस बिजनेस से संकरन ने बहुत पैसा बनाया।
संकरन के सर्कस में तमाम हस्तियां भी उसके शो को देखने आईं। उन लोगों में पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी प्रमुख थे।
संकरन में 1977 में जंबो सर्कस की स्थापना की और धीरे-धीरे इसे भी बुलंदियों पर पहुंचा दिया।
1998 में जबसे सर्कस में जानवरों के रखने पर प्रतिबंध लगा उसके दुर्दिन आ गए। अब सर्कस देखने वालों की संख्या काफी कम हो गई है क्योंकि देखने वाले अधिकांश लोग जानवरों की कलाबाजियां, खासकर शेर की, देखने जाते थे। पर अब जानवरों के अभाव में सर्कस जगत में जो सूनापन आया है, उसकी भरपाई किसी भी तरह नहीं की जा सकती।
जिस जेमिनी संकरन ने लगातार 79 वर्षों तक भारतीय दर्शकों का मनोरंजन किया, उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि तो बनती ही है। आइए हम स्व. संकरन को नमन करें। अगर आपने सर्कस न देखा हो तो भी उन्हें नमन करना चाहिए।
फोटो साभार-गूगल




