उत्तर प्रदेश

‘एक प्रधान हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया’, लोकसभा में पेपर लीक विधेयक पर अखिलेश यादव का केंद्र पर तीखा तंज

सपा प्रमुख ने नीट-यूजी 2026 विवाद, बंद होते सरकारी स्कूलों और आउटसोर्सिंग को लेकर सरकार को घेरा, रिजिजू के साथ हुई तीखी बहस

Lucknow Focus News Desk: संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान देश की सियासत गरमा गई है। लोकसभा में समाजवादी पार्टी के प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ हुए देशव्यापी छात्र आंदोलन का नतीजा बताया। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार ने एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया है।”

सदन को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने दावा किया कि करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों के भारी दबाव के कारण सरकार को झुकना पड़ा है। उन्होंने मांग की कि छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को दिए गए सभी आश्वासनों को सरकार संसद के सामने सार्वजनिक करे। अखिलेश यादव ने 2020-21 के किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सरकार केवल भारी दबाव में ही झुकती है।

कानून और आउटसोर्सिंग पर उठाए गंभीर सवाल

अखिलेश यादव ने सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि जब 2024 में पेपर लीक रोकने के लिए पहले ही कानून बना दिया गया था, तो उसके बाद नीट-यूजी 2026 जैसी बड़ी परीक्षा का पेपर कैसे लीक हो गया? उन्होंने दरोगा भर्ती, जूनियर इंजीनियर, सिपाही भर्ती और यूपीटीईटी जैसी दर्जनों परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 10 सालों में युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला गया है। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर निशाना साधते हुए कहा कि परीक्षाओं में आउटसोर्स व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पूरी व्यवस्था पंगु हो गई है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि विपक्ष को डर है कि कहीं पूरी सरकार ही आउटसोर्स न हो जाए।

शिक्षा व्यवस्था और नियुक्तियों पर लगाए बड़े आरोप

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के भगवाकरण का प्रयास करने और इसे कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश भर में एक लाख से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 26,386 स्कूल बंद किए गए हैं। इससे गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने 69 हजार शिक्षक भर्ती में हुए कथित घोटाले का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आरक्षण के नियमों की अनदेखी कर पिछड़ों और दलितों के हक छीने गए हैं।

संसद में किरेन रिजिजू से तीखी नोकझोंक

बहस के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप करते हुए अखिलेश यादव से पूछा कि क्या छात्रों की बात सुनकर संसद में विधेयक लाना बेहतर है या आंदोलन को कुचलने के लिए आपातकाल लगाना? इस पर पलटवार करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि उन्होंने आपातकाल तो नहीं देखा, लेकिन दिल्ली की सड़कों पर छात्रों और किसानों के खिलाफ आंसू गैस के गोले, कटीली बैरिकेडिंग और नुकीले अवरोधों का इस्तेमाल जरूर देखा है, जो किसी भी आपातकाल से कम नहीं था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जिस तरह आपातकाल के बाद देश में बड़ा राजनीतिक बदलाव आया था, वैसा ही परिवर्तन आगे भी देखने को मिलेगा।

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