नौचंदी मेले में गूंजा मुंशी प्रेमचंद का अमर संदेश, ‘मां’ नाटक के मंचन ने दर्शकों को रुलाया, तालियों से गूंजा पंडाल

Lucknow Focus News Desk: ऐतिहासिक मेरठ नौचंदी महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर सोमवार की रात देशभक्ति, त्याग और मां के ममतामयी रूप का एक अनूठा व भावुक संगम देखने को मिला। लखनऊ की विख्यात नाट्य संस्था ‘सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी’ की ओर से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कालजयी और बेहद मार्मिक कहानी ‘मां’ का भव्य नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया। नाटक की सशक्त पटकथा और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने पंडाल में मौजूद हर एक दर्शक को भावविभोर कर दिया। कहानी के उतार-चढ़ाव और मार्मिक दृश्यों के दौरान कई मौकों पर दर्शकों की आँखें नम हो गईं।

पुत्र मोह पर भारी पड़ा राष्ट्रधर्म: कलेजे के टुकड़े को देश पर किया न्योछावर
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘मां’ मूलतः नारी सशक्तीकरण, अस्मिता और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च बलिदान की एक अमर गाथा है। नाटक के माध्यम से समाज को यह कड़ा संदेश दिया गया कि देशप्रेम के आगे पुत्र मोह भी बौना साबित हो जाता है।
कहानी की मुख्य किरदार ‘सावित्री’ एक ऐसी भारतीय नारी है, जो देश के प्रति अपनी निष्ठा और अपने स्वतंत्रता सेनानी पति को दिए गए पवित्र वचन को निभाने के लिए अपने मातृत्व और पुत्र प्रेम की आहुति दे देती है। सावित्री ने अपने अद्वितीय और कड़े फैसले से न केवल स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी, बल्कि यह भी साबित किया कि एक भारतीय मां देश की रक्षा के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को भी हंसते-हंसते रणवेदी पर न्योछावर कर सकती है।
अभिनय की जुगलबंदी: सीमा मोदी और नवनीत मिश्रा ने बांधा समां
मंच पर कलाकारों की बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी इतनी कड़क थी कि दर्शकों ने खुद को उसी कालखंड में महसूस किया।
सावित्री का मुख्य किरदार: मुख्य भूमिका में वरिष्ठ रंगमंच कलाकार सीमा मोदी ने अपनी कला का जौहर दिखाया। उन्होंने सावित्री के मजबूत, भावुक और गरिमापूर्ण किरदार को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया। उनके संवादों की तीव्रता ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
क्रांतिकारी की भूमिका: मुख्य क्रांतिकारी के रूप में रंगमंच कलाकार नवनीत मिश्रा ने अपने दमदार और जोशीले अभिनय से पंडाल में राष्ट्रभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया।
सह-कलाकारों की टोली: क्रांतिकारी साथियों के रूप में सिद्धार्थ मौर्या, शिवम और आरती सहित बाल व युवा कलाकारों आहान, वैदिक, तुषार, इशिका, विराज, शुभ, दीपिका, अंजू, गीता, साहिबा और मीनाक्षी ने मंच पर स्वतंत्रता संग्राम के दौर को बखूबी री-क्रिएट किया।
लेखन व निर्देशन: इस क्लासिक कहानी का उत्कृष्ट और धारदार नाट्यरूपांतरण वरिष्ठ लेखक के. के. अग्रवाल द्वारा किया गया, जबकि नाटक का कुशल और संवेदनशील निर्देशन स्वयं सीमा मोदी ने संभाला।

नेपथ्य (पर्दे के पीछे) की मजबूत कमान
किसी भी नाटक की सफलता में पर्दे के पीछे काम करने वाले बैकस्टेज कलाकारों का बहुत बड़ा योगदान होता है, जो इस नाटक में साफ दिखाई दिया।
सेट डिजाइन: अभिषेक शर्मा द्वारा तैयार किया गया ऐतिहासिक सेट दर्शकों को सीधे अंग्रेजी हुकूमत के दौर में ले गया।
बैकग्राउंड संगीत: विनायक तिवारी के पार्श्व संगीत (Background Music) ने दृश्यों की भावुकता और देशभक्ति की गंभीरता को कई गुना बढ़ा दिया।
प्रॉपर्टीज: आशीष पांडे द्वारा तैयार की गई मंच सामग्री ने नाटक की वास्तविकता में चार चांद लगाए।
दर्शकों ने दिया स्टैंडिंग ओवेशन, कलाकारों का हुआ सम्मान
प्रस्तुति के समापन पर मुख्य अतिथि, प्रशासनिक अधिकारियों और पंडाल में उपस्थित भारी जनसमूह ने अपनी जगह पर खड़े होकर (Standing Ovation) कई मिनटों तक तालियां बजाकर पूरी टीम की सराहना की। नौचंदी महोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी के सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। समिति ने कहा कि आज के दौर में ऐसे नाटक युवा पीढ़ी में देशभक्ति और नैतिक मूल्यों को जगाने का सबसे बेहतरीन माध्यम हैं।




