अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका आजमगढ़ का बेटा, नेपाल में अरविंद चित्रांश को मिला ‘आचार्य गौरी शंकर पाण्डेय सम्मान-2026’

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली साबित हुआ है। आजमगढ़ के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार, अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम (भारत) के संयोजक एवं भोजपुरी कला-संस्कृति के मर्मज्ञ अरविंद चित्रांश को नेपाल में एक भव्य समारोह के दौरान “आचार्य गौरी शंकर पाण्डेय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान-2026” से विभूषित किया गया है।
यह सम्मान अरविंद चित्रांश द्वारा पिछले 25 वर्षों से वैश्विक स्तर पर भोजपुरी भाषा, समृद्ध साहित्य और लोक-संस्कृति के प्रचार-प्रसार व उसे स्थापित करने के अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह सम्मान केवल एक कलाकार का आदर नहीं, बल्कि भारत-नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने वाला एक मजबूत सेतु बन गया है।
श्रीमद् भगवद् गीता के भोजपुरी संस्करण के लोकार्पण पर मिला सम्मान
यह ऐतिहासिक और अंतर्राष्ट्रीय सम्मान समारोह नेपाल के उस गरिमामयी अवसर पर आयोजित हुआ, जब वहां के जाने-माने लेखक कौशल किशोर पांडेय द्वारा लिखित पुस्तक का लोकार्पण किया जा रहा था। कौशल किशोर पांडेय ने श्रीमद् भगवद् गीता के गूढ़ अर्थ, कर्म योग, सांख्य योग और आध्यात्मिक योग को बेहद सरल और सुबोध भोजपुरी भाषा में रूपांतरित किया है, ताकि यह पावन संदेश जन-जन तक पहुंच सके।
नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज साहित्यकारों ने सौंपा अवार्ड
अरविंद चित्रांश को यह सम्मान नेपाल के मधेश प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जितेंद्र सोनम, नेपाल भोजपुरी फाउंडेशन के अध्यक्ष विजय किशोर पांडेय एवं भोजपुरी साहित्य विकास मंच के महासचिव प्रकाश प्रियांशु द्वारा देश-विदेश के प्रमुख साहित्यकारों की मौजूदगी में प्रदान किया गया।
इस ऐतिहासिक पल के गवाह नेपाल राजकीय भाषा आयोग के सदस्य गोपाल अश्क, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ब्रजभूषण मिश्र, रामप्रसाद शाह, हरेंद्र हिमकर, प्रसिद्ध कवि राम बहादुर राय, कवयित्री प्रिया मिश्रा, अस्मिता पटेल और बीरगंज भोजपुरी प्रतिष्ठान की अध्यक्ष अनीता शाह जैसे दिग्गज बने।
संस्कृति की ताकत से सीमाएं मिट जाती हैं- अरविंद चित्रांश
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होने के बाद भावुक और ऊर्जान्वित नजर आए अरविंद चित्रांश ने भारत-नेपाल के त्रेतायुगीन संबंधों को याद करते हुए कहा “भारत और नेपाल का संबंध सिर्फ दो देशों का नहीं, बल्कि त्रेता युग से चला आ रहा ‘बेटी-रोटी’ और आत्मा का संबंध है। मिथिला से माता जानकी अयोध्या आईं और प्रभु श्रीराम जनकपुर गए। यह श्रीराम के धनुष ‘कोदंड’ की ‘कोमलता’ ही है, जो दोनों देशों के दिलों को जोड़ती है। आज भी नेपाल में 2 करोड़ से अधिक भोजपुरी भाषी लोग रहते हैं। रक्सौल-बीरगंज या सुनौली-भैरहवा कोई अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर नहीं, बल्कि हमारे सगे भाइयों की ‘दुआरी’ (दरवाजा) है।”
उन्होंने आगे कहा कि चाहे भोजपुरी गीत हों, सोहर, कजरी, चैता हो या विदेशिया लोकनाट्य और बिरहा दोनों देशों का सुर, ताल और दर्द बिल्कुल एक है। जब संस्कृति अपनी ताकत दिखाती है, तो भौगोलिक सीमाएं अपने आप मिट जाती हैं।




