UP Permanent DGP News: यूपी को 4 साल बाद मिल सकता है स्थायी डीजीपी! रेस में सबसे आगे कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे और प्रशासनिक हलके से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी को करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद अब पूर्णकालिक और स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने जा रहा है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से भेजे गए तीन वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों के पैनल पर शासन स्तर पर मंथन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
अंतिम निर्णय के लिए इस फाइल और प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी की कमान संभाल रहे 1991 बैच के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है।
यूपीएससी पैनल में शामिल हैं 1990 और 1991 बैच के ये 3 दिग्गज नाम
नियमों के मुताबिक, नई दिल्ली में 26 मई को हुई संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की उच्च स्तरीय बैठक के बाद तीन वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल तैयार कर उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया था। इस पैनल में निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
रेणुका मिश्रा: 1990 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी।
पीयूष आनंद: 1991 बैच के अनुभवी आईपीएस अधिकारी।
राजीव कृष्ण: 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी और वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी।
इन तीनों नामों में से वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का दावा सबसे मजबूत और शीर्ष पर माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम और आधिकारिक फैसला मुख्यमंत्री स्तर से ही लिया जाना बाकी है।
अनुभव का लंबा रिकॉर्ड: 2028 तक संभाल सकते हैं उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान
1991 बैच के आईपीएस राजीव कृष्ण पुलिस महकमे में अपने लंबे प्रशासनिक, सूझबूझ और बेहतरीन मैदानी (Field) अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने प्रदेश के कई अत्यंत संवेदनशील जिलों, रेंजों और जोनों में बतौर कप्तान और आईजी/एडीजी के रूप में बड़ी जिम्मेदारियां बखूबी संभाली हैं। वह 1 जून, 2025 से उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों (प्रकाश सिंह मामले) और यूपीएससी की व्यवस्था के अनुसार, राज्य में नियुक्त होने वाले स्थायी डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होना अनिवार्य है। इस नियम के तहत, यदि राजीव कृष्ण के नाम पर मुहर लगती है, तो वह वर्ष 2028 तक यूपी पुलिस के मुखिया के पद पर बने रह सकते हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के स्थायित्व के लिए बड़ा कदम होगा।
साल 2022 से चल रहा था ‘कार्यवाहक’ का दौर
उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर पिछले चार सालों से लगातार चर्चाएं और कानूनी पेच फंसते रहे हैं। साल 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से ही सूबे में कोई भी स्थायी डीजीपी नियुक्त नहीं हो सका था। तब से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान कार्यवाहक कप्तानों के भरोसे ही चल रही थी। अब इस नए फैसले से ‘कार्यवाहक’ के दौर पर पूरी तरह विराम लगने की उम्मीद है।




