लखनऊ

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजभाषा हिंदी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन 

लखनऊ फोकस रिपोर्टर
लखनऊ। हिंदी प्रकोष्ठ, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय,लखनऊ द्वारा भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जन्मशती समारोह के उपलक्ष्य में ‘मातृभाषा दिवस’ पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘राजभाषा से राष्ट्रभाषा की ओर’ का आयोजन शुक्रवार, 21 फरवरी, 2025 को पृथ्वी एवं पर्यावरण विद्यापीठ सभागार, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उप मुख्यमंत्री, उ.प्र.सरकार व वर्तमान राज्यसभा सांसद  प्रो.दिनेश शर्मा और बीज वक्ता सभापति,हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सभापति, भारतीय हिंदी परिषद्, प्रयाग प्रो.पवन अग्रवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर एस.के.द्विवेदी ने की।अतिथियों का स्वागत वक्तव्य कुलसचिव  प्रो. यू.वी.किरण ने किया।कार्यक्रम संगोष्ठी का संयोजन सहायक निदेशक (राजभाषा) बी.बी.ए.यू,  डॉ.बलजीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
बीज वक्ता प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने सभा का मार्गदर्शन किया । उन्होंने आजादी के 75 वर्ष बीत जाने पर भी हिंदी के पूर्णतः राजभाषा पद पर प्रतिष्ठित ना होने पर चिंता व्यक्त की । उन्होंने राजभाषा हिंदी के विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए इनमें राजभाषा मंत्रालय, भारतीय भाषा विश्वविद्यालय और अनुवाद प्राधिकरण की स्थापना मुख्य है ।
मुख्य अतिथि प्रो. दिनेश शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं अपितु संस्कारों की जननी है।आज हिंदी का शब्दकोश सम्पन्न है और सरकार क्षेत्रीय भाषाओं को लगातार बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। वर्तमान में केंद्रीय कार्यालयों में लगभग 65% तक कर्मचारी हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं और सरकार द्वारा इसकी वृद्धि के लिए द्रुति गति से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने का सपना गांधी जी का था और आने वाले दिनों में यह अवश्य पूर्ण होगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. पवन अग्रवाल ने हिंदी को स्वतन्त्रता आंदोलन की भाषा बताया और कहा कि आज हिंदी रोजगार की भाषा बन रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे  विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. के. द्विवेदी ने राष्ट्रभाषा को देश की पहचान बताते हुए कहा कि राष्ट्र भाषा राष्ट्रीय एकता को द्योतक है। यह संस्कृति की संवाहक और संरक्षक होती है।
कार्यकम की द्वितीय सत्र में महनीय शिक्षाविदों एवं साहित्यकारों द्वारा राजभाषा हिंदी के विषय में विचार विमर्श किया गया। जिसमें राजभाषा हिंदी के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए। इस विचार विमर्श में प्रो. राम पाल गंगवार, प्रो. हरीश शर्मा, प्रो. विजय श्रीवास्तव, विनोद शर्मा, अनिल कुमार विश्वकर्मा, डॉ. प्रीति राय जैसे प्रतिष्ठित जनों की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के समापन सत्र में राजभाषा के विकास के क्षेत्र में कार्यरत सम्माननीय शिक्षाविदों ने हिंदी को ‘राजभाषा से राष्ट्रभाषा की ओर’ उत्तरोत्तर विकास के लिए विचार मंथन किया। इसमें प्रो. राजनारायन शुक्ल, प्रो. राजशरण शाही, डॉ. सुभाष मिश्र एवं अन्य कई विद्वत जनों की सहभागिता रही।
इस कार्यक्रम में कविता एवं निबंध प्रतियोगिता के प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों को पुरस्कृत किया गया। साथ ही संगोष्ठी के विषय ‘राजभाषा से राष्ट्रभाषा की ओर’ के विविध उपविषयों पर विभिन्न विश्वविद्यालय से आए हुए शोधार्थियों ने शोध पत्र प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विश्व रंगमंच हिंदी ओलंपियाड – 2025 की विवरणिका का लोकार्पण भी किया गया।
इस समारोह के विविध सत्रों का कुशल संचालन डॉ. लता बाजपेई सिंह, डॉ. नमिता जैसल एवं संध्या सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में संगोष्ठी के संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा सम्माननीय शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं शोधार्थियों का आभार ज्ञापन किया गया।

 

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