भारतीय कालगणना को अपनाने की जरूरत : आरोह श्रीवास्तव


FEBRUARY 7, 2021
स्वागत समारोह में बोले वैदिक घड़ी के आविष्कारक युवा वैज्ञानिक
लखनऊ से कन्याकुमारी तक की है साइकिल यात्रा
लखनऊ फोकस ब्यूरो
लखनऊ (Lucknow News, Vedic Clock news)। भारतीय कालगणना सूर्य पर आधारित है किंतु वर्तमान समय में उपयोग किए जाने वाला टाइम फॉर्मेट मिस्र की सभ्यता का है। यही कारण है कि यह कई जटिलताओं का कारण है। इसीलिए वेदों में की गई गणनाओं के आधार पर वैदिक घड़ी का आविष्कार किया गया है ताकि भारतीय काल गणना को अधिक से अधिक अपनाया जा सके। ये बातें युवा वैज्ञानिक (Young Scientist) और वैदिक घड़ी (Vedic Clock) के आविष्कारक आरोह श्रीवास्तव (Aroh Srivastava) ने कहीं।
आरोह श्रीवास्तव (Aroh Srivastava) रविवार को जियामऊ स्थित विश्व संवाद केंद्र में आयोजित अपने स्वागत समारोह में बोल रहे थे। उनका स्वागत समारोह छह हजार किलोमीटर की भारत यात्रा करके लौटने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। लखनऊ से कन्याकुमारी तक की यह कठिन यात्रा उन्होंने साइकिल से पूरी की है।
विश्व संवाद केंद्र में युवा वैज्ञानिक का स्वागत समारोह कई संस्थाओं ने मिलकर किया था। इनमें स्वदेशी जागरण मंच, अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, समर्थ नारी समर्थ भारत, भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ अवध प्रांत, दुर्गा पूजा समिति गोमतीनगर, हिंदू जागरण मंच, दीनदयाल उपाध्याय सेवा समिति, संस्कार भारती, विश्व संवाद केंद्र, नारायण सेवा संस्थान, खुशी फाउंडेशन, माधवबाग आयुर्वेदिक संस्थान, धर्म जागरण मंच, सामाजिक समरसता मंच, गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार शामिल थे।
जानिए वैदिक घड़ी को
इस वैदिक घड़ी का नाम घटीयंत्रम (Vedic Clock) में सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक समय को तीस भागों में वेदों के अनुसार विभाजित किया गया है। जिस प्रकार आज समय जानने के लिए घंटे-मिनट-सेकेंड का प्रयोग होता है, उसी प्रकार वैदिक घटीयंत्रम में मुहूर्त-काल-कास्था का प्रयोग होता है। प्रत्येक दिन में तीस मुहूर्त, एक मुहूर्त में तीस काल और एक काल में तीस कास्था होते हैं। यह उसी प्रकार है जिस प्रकार प्रत्येक दिन में 24 घंटे, एक घंटे में 60 मिनट और एक मिनट में 60 सेकेंड होते हैं। हमारी वैदिक घड़ी का एक मुहूर्त बराबर वर्तमान घड़ी अनुसार 48 मिनट, एक काल बराबर 96 सेकेंड और एक कास्था बराबर 1.6 सेकेंड हैं।
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