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ओएनडीसी से जुड़ने पर MSMEs की कमाई में 20% की बढ़ोतरी: ईजी पे रिपोर्ट

Lucknow Focus News Desk: भारत सरकार के डिजिटल व्यापार मंच ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) छोटे और मझोले कारोबारियों (MSMEs) के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहा है। पेमेंट सॉल्यूशन कंपनी ईजी पे की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ओएनडीसी से जुड़ने वाले MSMEs की औसत आय में 20% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह वृद्धि खास तौर पर छोटे और मझोले शहरों में देखने को मिली है, जहां कारोबारी अब अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र सबसे आगे

रिपोर्ट के मुताबिक, ओएनडीसी से सबसे अधिक MSMEs राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़े हैं। ये राज्य डिजिटल व्यापार को अपनाने में अग्रणी माने जा रहे हैं। बीते एक वर्ष में ईजी पे ने ओएनडीसी से जुड़ने वाले कारोबारियों की संख्या में भारी इजाफा देखा है।

ईजी पे का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक यह मंच एक लाख से अधिक कारोबारियों को जोड़ने में सफल रहेगा। यह उपलब्धि भारत के छोटे शहरों में व्यवसाय कर रहे उद्यमियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

“बिजनेस को डेमोक्रेटिक बना रहा है ओएनडीसी”

ईजी पे के मैनेजिंग डायरेक्टर निलय पटेल ने कहा, “ओएनडीसी के साथ हमारा सहयोग यह दर्शाता है कि अब बिजनेस छोटे शहरों से भी आसानी से और प्रभावी रूप से चलाया जा सकता है। यह मंच व्यापार को डेमोक्रेटिक और डीसेंट्रलाइज्ड बनाता है, जिससे छोटे कारोबारी भी बड़े ब्रांड्स के साथ बराबरी से मुकाबला कर सकते हैं।”

ईजी पे उन शुरुआती फिनटेक कंपनियों में शामिल है, जो ओएनडीसी पर रिटेल और फाइनेंशियल सर्विसेज को इंटीग्रेट कर रही हैं। कंपनी छोटे कारोबारियों को डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेल्स की सुविधा प्रदान कर रही है, जिससे उनकी पहुंच और आमदनी दोनों में वृद्धि हो रही है।

डिजिटल इकॉनॉमी में मिल रही नई पहचान

ओएनडीसी का मॉडल छोटे और मझोले शहरों में व्यापार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह मंच MSMEs को न सिर्फ तकनीकी सहायता देता है, बल्कि उन्हें बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी मदद करता है। इससे छोटे कारोबारी न केवल अपनी बिक्री बढ़ा पा रहे हैं, बल्कि डिजिटल इकॉनॉमी में एक मजबूत पहचान भी बना रहे हैं। ओएनडीसी और ईजी पे जैसे मंचों के सहयोग से छोटे शहरों के व्यापारी अब डिजिटल क्रांति का हिस्सा बन रहे हैं और भारत के आत्मनिर्भरता के विज़न को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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