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इंदिरा गांधी सरकार में मंत्री रहे अरविंद नेताम होंगे RSS कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, मोहन भागवत के साथ साझा करेंगे मंच

Lucknow Focus News Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आगामी कार्यक्रम में एक चौंकाने वाला नाम मुख्य अतिथि के रूप में सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता रह चुके अरविंद नेताम को संघ ने 5 जून को नागपुर में होने वाले अपने द्वितीय वर्ष प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत भी उपस्थित रहेंगे। अरविंद नेताम, जो कभी इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं, अब संघ के मंच पर दिखाई देंगे।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

नेताम का संघ के मंच पर आना सिर्फ एक आम उपस्थिति नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा करने वाला घटनाक्रम है। इससे पहले भी 2018 में पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी ने संघ के कार्यक्रम में शिरकत की थी, जो उस समय व्यापक चर्चा का विषय बना था।

नेताम का राजनीतिक सफर

  • अरविंद नेताम चार बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं।
  • वह इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
  • नेताम ने पहली बार 1996 में कांग्रेस छोड़ी थी, लेकिन दो साल बाद वापस लौट आए।
  • 2012 में पार्टी ने उन्हें बाहर कर दिया, लेकिन 2018 में छत्तीसगढ़ चुनाव से पहले वे फिर शामिल हो गए।
  • 2023 में उन्होंने कांग्रेस को अंतिम बार अलविदा कह दिया और आदिवासी हितों के लिए ‘हमर राज पार्टी’ की स्थापना की।

पार्टी छोड़ने का ऐलान और नया संकल्प

2023 में कांग्रेस छोड़ते समय नेताम ने सार्वजनिक मंच से ऐलान किया था कि वे अब किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं होंगे और आदिवासी समाज के हितों के लिए ही कार्य करेंगे। उन्होंने कहा था, “हमने इंदिरा गांधी से भी कहा था कि हम पहले आदिवासी हैं, फिर कांग्रेसी।”

RSS के साथ मंच साझा करने के मायने

RSS द्वारा नेताम को मुख्य अतिथि बनाना और उनका मंच पर मोहन भागवत के साथ दिखना कई संकेत देता है। यह न केवल आदिवासी समुदाय को लेकर संघ की रणनीति की ओर इशारा करता है, बल्कि नेताम के राजनीतिक रुख में भी एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

क्या संकेत दे रहा यह समीकरण?

नेताम की यह उपस्थिति उनकी भविष्य की राजनीति के संकेत दे सकती है, जहां कांग्रेस से दूरी और संघ से संवाद एक नया समीकरण रच सकता है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी यह घटनाक्रम आने वाले समय में अहम भूमिका निभा सकता है।

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