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Health Update: सिगरेट सिर्फ कैंसर नहीं देती, दर्जनों जानलेवा बीमारियों की बनती है वजह

Lucknow Focus News Desk: धूम्रपान यानी स्मोकिंग एक धीमा ज़हर है, जो धीरे-धीरे इंसान की सेहत को भीतर से खोखला कर देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लाखों लोग सिर्फ सिगरेट पीने की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। लंग कैंसर विशेषज्ञ डॉ. जमाल ए. खान बताते हैं कि स्मोकिंग न सिर्फ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बनती है, बल्कि शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है।

कौन-कौन सी बीमारियां देती है स्मोकिंग?

लंग कैंसर – धूम्रपान करने वालों में लंग कैंसर का खतरा 15 से 30 गुना अधिक होता है। आंकड़ों के मुताबिक 90% लंग कैंसर के केस स्मोकिंग से जुड़े हैं।

सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) – यह फेफड़ों की गंभीर बीमारी है, जो सांस लेने में तकलीफ देती है। सीओपीडी से जुड़ी 90% मौतें स्मोकिंग की वजह से होती हैं।

हार्ट डिजीज – सिगरेट पीने वालों में हार्ट अटैक का खतरा चार गुना ज्यादा होता है। निकोटीन दिल तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम कर देता है, जिससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

स्ट्रोक – स्मोकिंग ब्रेन में ब्लड सप्लाई को प्रभावित करती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा दोगुना हो जाता है। इसका नतीजा लकवा, बोलने में दिक्कत या मौत तक हो सकती है।

एओर्टिक एन्यूरिज्म – सिगरेट पीने वाले पुरुषों में महाधमनी (Aorta) के फटने की आशंका अधिक होती है, जो जानलेवा हो सकता है।

मुंह और गले का कैंसर (Oropharyngeal Cancer) – स्मोकिंग और तंबाकू चबाने से होंठ, जीभ, मसूड़ों और वॉइस बॉक्स का कैंसर हो सकता है।

एसोफैजियल कैंसर – गले और भोजन नली का कैंसर भी धूम्रपान से बढ़ता है, खासकर जब शराब का सेवन भी साथ हो।

कैटरैक्ट (मोतियाबिंद) – स्मोकिंग आंखों की रोशनी छीन सकती है। यह मोतियाबिंद का बड़ा कारण माना जाता है।

टाइप-2 डायबिटीज – धूम्रपान करने वालों में डायबिटीज होने की संभावना 30-40% ज्यादा होती है। साथ ही इससे जुड़ी जटिलताएं भी बढ़ जाती हैं।

रूमेटॉयड आर्थराइटिस – स्मोकिंग से जोड़ों में सूजन, दर्द और विकृति वाली इस बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।

सडन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (SIDS) – गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने वाली महिलाओं के शिशुओं में अचानक मृत्यु का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन – धूम्रपान से खून का प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे यौन समस्याओं का खतरा 60% तक बढ़ सकता है।

सिगरेट पीना सिर्फ एक आदत नहीं बल्कि शरीर के लिए एक खतरनाक धीमा जहर है। यह न केवल फेफड़ों बल्कि दिल, आंख, गले, दिमाग और यहां तक कि नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान छोड़ना ही इन जानलेवा बीमारियों से बचने का एकमात्र तरीका है।

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