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अमेरिका का बड़ा फैसला: तांबे के आयात पर 50% टैरिफ, भारत पर होगा सीमित असर

Lucknow Focus News Desk: अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए 1 अगस्त, 2025 से सभी सेमी-फिनिश्ड कॉपर प्रोडक्ट्स (तांबे के अर्ध-निर्मित उत्पादों) पर 50% आयात शुल्क लगाने का ऐलान किया है। यह बड़ा फैसला 30 जुलाई को व्हाइट हाउस के एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए लिया गया है। इस कदम का मकसद तांबे के लिए विदेशी देशों पर अमेरिका की बढ़ती निर्भरता को कम करना है।

इस नए टैरिफ का असर दुनिया के सभी देशों पर पड़ेगा, और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। हालांकि, भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर इसका प्रभाव बहुत कम होगा।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक, अजय श्रीवास्तव ने बताया, “यह टैरिफ सभी देशों पर समान रूप से लागू होगा, जिसमें अमेरिका के करीबी सहयोगी जैसे जापान और यूरोपीय यूनियन भी शामिल हैं। ऐसे में भारत को कोई खास नुकसान नहीं होगा और तांबे के व्यापार पर इसका असर सीमित ही रहेगा।”

भारत के लिए चिंता की बात क्यों नहीं?

भारत मुख्य रूप से तांबे का आयातक देश है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने $14.45 बिलियन का तांबा आयात किया, जिसमें चिली, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश प्रमुख आपूर्तिकर्ता थे। इसके अलावा, भारत ने अमेरिका से $288 मिलियन मूल्य का कॉपर स्क्रैप भी आयात किया, जो अब महंगा हो सकता है।

श्रीवास्तव के अनुसार, भारत और अमेरिका की टैक्स नीतियों में बड़ा फर्क है। अमेरिका ने जहां 50% का टैरिफ लगाया है, वहीं भारत में तांबे पर दरें काफी कम हैं। भारत तांबे की धातु पर 2.5%, रिफाइंड कॉपर पर 5% और कुछ कॉपर आर्टिकल्स पर अधिकतम 10% शुल्क लगाता है। भारत की यह उदार नीति घरेलू उद्योगों को अधिक लचीलापन देती है।

अमेरिका के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

बाइडेन प्रशासन ने पहले तांबे को एक रणनीतिक सामग्री बताया था, जो इलेक्ट्रिक गाड़ियों, सेमीकंडक्टर्स, पावर ग्रिड्स और रक्षा उपकरणों जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए जरूरी है। अब जब सरकार ने तांबे की इनपुट कॉस्ट अचानक 50% बढ़ा दी है, तो इन क्षेत्रों में उत्पादन लागत भी तेजी से बढ़ेगी।

श्रीवास्तव ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से अमेरिका में उत्पादन धीमा हो सकता है, कीमतें बढ़ सकती हैं और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में चल रहे प्रयासों को भी झटका लग सकता है।

भले ही भारत ने वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका को $360 मिलियन मूल्य के तांबे के उत्पाद निर्यात किए थे, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निर्यातकों पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा। भारत का अमेरिका के साथ तांबे का व्यापार बहुत बड़ा नहीं है और देश में तांबे की घरेलू मांग काफी मजबूत है।

इसलिए, अमेरिका का यह बड़ा कदम जहां उसकी अपनी इंडस्ट्री के लिए चुनौती बन सकता है, वहीं भारत फिलहाल इस फैसले को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं दिख रहा है।

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