पहले मिट्टी के घरौंदों का भी आकर्षण होता था दीवाली पर

लखनऊ फोकस विशेष।
लखनऊ। बचपन में दीपावली पर पटाखों और मिट्टी के खिलौनों की तरह एक आकर्षण घरौदों का भी होता था। घरौंदे बच्चे खेल-खेल में बनाते थे। घरौंदा अर्थात घर का एक छोटा प्रतिरूप। उसमें कमरे होते थे। छत होती थी। इसके अलावा दरवाजे-खिड़कियां, जीने सब कुछ तो होते थे। जलता दीपक इन घरौंदों पर भी रखा जाता था। उद्देश्य होता था-इन घरौंदों में भी लक्ष्मी का आह्वान करना।
समय बीतने के बाद अब बच्चे घरौंदे नहीं बनाते। वे बड़ों की तरह मोबाइल में व्यस्त रहते हैं या बड़े और महंगे खिलौनों से खेलते हैं।
नई पीढ़ी के तमाम बच्चे तो मिट्टी के इन घरौंदों के बारे में जानते तक नहीं। आज समय की आवश्यकता है कि इन मिट्टी के प्रतिरूपों के बारे में नई पीढ़ी को बताया जाए। उन प्रतिरूपों के बारे में जिनमें बच्चों की मेहनत के साथ उनकी भावनाएं भी जुड़ी होती थीं।

(फोटो सौजन्य-सोशल मीडिया)




