यूपी को एनीमिया मुक्त बनाने की पहल: महिला लीडरशिप से होगा ’12 के पार’ का लक्ष्य हासिल

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश को एनीमिया (खून की कमी) से मुक्त बनाने के लिए बुधवार को लखनऊ में एक बड़ा कदम उठाया गया। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ एक साथ आए और यह शपथ ली कि वे मिलकर एनीमिया को खत्म करेंगे। इस दौरान यह तय किया गया कि गांव-गांव में महिला शिक्षक, महिला प्रधान, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस अभियान का नेतृत्व करेंगी।
एनीमिया को बताया ‘विकसित भारत’ में सबसे बड़ी बाधा
केजीएमयू और सेंटर ऑफ एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में, स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अमित घोष ने कहा कि जब हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की बात करते हैं, तो एनीमिया उसमें एक बड़ी बाधा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस समस्या से लड़ने के लिए सभी व्यवस्थाएं कर ली हैं, अब प्रयासों में कमी नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मौजूद महिलाओं से अपील की कि वे उन महिलाओं तक पहुंचें जो स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं जा पाती हैं और उन्हें एनीमिया के प्रति जागरूक करें।
महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि उनका विभाग बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध करा रहा है। इसके साथ ही, पोषण पाठशाला के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

कम महिलाएं ही लेती हैं आयरन की दवा
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कुछ चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सिर्फ 22.3% गर्भवती महिलाएं ही आयरन फॉलिक एसिड (आईएफए) की खुराक 100 दिनों तक लेती हैं, जबकि केवल 9.7% महिलाएं ही 180 दिनों तक दवा का सेवन कर पाती हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर है और इसे तुरंत सुधारने की जरूरत है।
विशेषज्ञों ने भी माना कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से किशोरियों के एनीमिया टेस्ट और मातृ एवं शिशु पोषण में पिता की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।




