लखनऊ

लखनऊ का स्वाद और अटल जी की यादें, मलाई पान और ठंडाई के मुरीद थे पूर्व प्रधानमंत्री

Lucknow Focus News Desk: पूर्व प्रधानमंत्री और ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी की 25 दिसंबर को 101वीं जयंती है। राजनीति के अजातशत्रु अटल जी का नवाबों की नगरी लखनऊ से केवल संसदीय रिश्ता नहीं था, बल्कि यहाँ की गलियों और स्वाद से उनका अटूट प्रेम था। 1991 से 2004 तक लखनऊ के सांसद रहे अटल जी यहाँ की खास चाट, ठंडाई और मलाई पान के इस कदर दीवाने थे कि प्रधानमंत्री रहने के दौरान भी इनका लुत्फ उठाना नहीं भूलते थे।

अटल जी के पसंदीदा जायके: कहां क्या था खास?

अटल जी के खाने-पीने के शौक और उनकी पसंद को पूरा करने की जिम्मेदारी अक्सर उनके करीबी सहयोगी लालजी टंडन के कंधों पर होती थी।

व्यंजन स्थान (दुकान) विशेषता
मलाई गिलौरी (मलाई पान) राम आसरे, चौक यह उनकी सबसे पसंदीदा मिठाई थी। वे इसे खुद भी खाते और अतिथियों को भी शौक से खिलाते थे।
ठंडाई राजा की ठंडाई, चौक उन्हें साधारण केसर वाली ठंडाई बेहद पसंद थी।
चाट टिल्लू गुरु (चौक) एवं पंडित राम नारायण तिवारी (लाटूश रोड) अटल जी अपनी पसंद से चाट बनवाते थे। उन्हें खट्टी चटनी और नींबू के साथ चाट खाना बहुत भाता था।

“मैं लखनऊ का था, लखनऊ का हूं और लखनऊ का ही रहूंगा”

अटल जी ने जनसंघ के समय से ही लखनऊ को अपनी कर्मभूमि बनाया था। उनके जीवन में लखनऊ का स्थान कितना ऊंचा था, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1991 में उन्होंने विदिशा और लखनऊ दोनों सीटों से चुनाव जीता, लेकिन उन्होंने विदिशा छोड़ दी और लखनऊ को ही अपना संसदीय क्षेत्र बनाए रखा। वे 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार यहाँ से जीतकर संसद पहुंचे। वे तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने और हर बार लखनऊ ने ही उन्हें सदन तक पहुंचाया।

अटल जी अक्सर गर्व से कहते थे कि उनका लखनऊ से रिश्ता केवल वोटों का नहीं, बल्कि दिलों और यहां की तहजीब का है। उनकी 101वीं जयंती पर लखनऊ के लोग आज भी उन किस्सों को याद करते हैं जब देश का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति चौक की तंग गलियों के स्वाद का आनंद लेने पहुंच जाता था।

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