चुनावी फंड का ‘शक्ति परीक्षण’, बीजेपी के पास ₹6,900 करोड़ का बैलेंस, कांग्रेस के खाते में महज 53 करोड़

Lucknow Focus News Desk: दिल्ली विधानसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए वित्तीय खुलासों ने देश की प्रमुख पार्टियों के बीच आर्थिक असमानता की एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। आंकड़ों के मुताबिक, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच बैंक बैलेंस का अंतर अब 130 गुना से भी अधिक हो गया है।
बैंक बैलेंस: कौन कहां खड़ा है?
चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार, दिल्ली चुनाव के समय पार्टियों के बैंक खातों की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
| राजनीतिक दल | बैंक जमा राशि (लगभग) |
| भारतीय जनता पार्टी (BJP) | ₹6,900 करोड़+ |
| बहुजन समाज पार्टी (BSP) | ₹580 करोड़ |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | ₹53 करोड़ |
| आम आदमी पार्टी (AAP) | ₹9.9 करोड़ |
| सीपीएम (CPM) | ₹4 करोड़ |
| सीपीआई (CPI) | ₹41 लाख |
चौंकाने वाले तथ्य: प्रदर्शन बनाम पैसा
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मायावती की पार्टी की बढ़त: रिपोर्ट के अनुसार, चुनावी प्रदर्शन में गिरावट के बावजूद बसपा (BSP) की वित्तीय स्थिति काफी मजबूत है। उसके पास कांग्रेस से 10 गुना अधिक यानी ₹580 करोड़ की जमा राशि है।
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कांग्रेस का चंदा: कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ₹517 करोड़ का चंदा प्राप्त किया (₹20,000 से अधिक वाले दान), लेकिन खर्चों के बाद पार्टी के पास बैंक बैलेंस के रूप में मात्र ₹53 करोड़ ही बचे हैं।
चुनावी चंदे के नियम
राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के सामने दो तरह की रिपोर्ट देनी होती है।
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कंट्रीब्यूशन स्टेटमेंट: इसमें ₹20,000 से अधिक के व्यक्तिगत और कॉरपोरेट दान का विवरण होता है।
- बैंक बैलेंस विवरण: चुनावों के बाद पार्टियों को अपनी वित्तीय स्थिति साफ करनी होती है।उल्लेखनीय है कि कुल संग्रह का एक बड़ा हिस्सा ₹20,000 से कम के ‘गुमनाम’ छोटे दानों से भी आता है, जिसका विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है।
बिहार चुनाव पर अभी सस्पेंस
जहाँ दिल्ली चुनाव के आंकड़े सामने आ चुके हैं, वहीं बिहार विधानसभा चुनावों के बाद अभी तक किसी भी प्रमुख दल ने अपना बैंक बैलेंस विवरण आयोग को नहीं सौंपा है, जिससे वहां की वित्तीय स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
