उत्तर प्रदेश

अहमद हसन न्यायप्रिय पुलिस अधिकारी और आदर्श राजनेता थे: मौलाना ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली

अहमद हसन वेलफेयर ट्रस्ट ने मनाई पूर्व स्वास्थ्य मंत्री की 92वीं जयंती; वेबिनार और राहत सामग्री वितरण का हुआ आयोजन

Lucknow Focus News Desk: अहमद हसन वेलफेयर ट्रस्ट, लखनऊ की ओर से उत्तर प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री स्व. अहमद हसन की 92वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस मौके पर उनके परिवारजनों द्वारा मदरसों में क़ुरआन ख़्वानी और ईसाल-ए-सवाब कर उन्हें याद किया गया। ट्रस्ट द्वारा अहमद हसन: जीवन और व्यक्तित्व” विषय पर एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उनके पुराने सहयोगी और पूर्व पुलिस अधिकारी श्री शारिक़ अलवी ने की।

सांप्रदायिक सौहार्द और न्याय के प्रतीक थे अहमद हसन

​वेबिनार को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और ईदगाह के इमाम, मौलाना ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली ने कहा, “अहमद हसन साहब एक कर्तव्यनिष्ठ और वफ़ादार पुलिस अधिकारी के साथ-साथ एक महान राजनेता भी थे। उन्होंने हमेशा सांप्रदायिक विवादों को निष्पक्ष ढंग से सुलझाया। शिक्षा मंत्री के रूप में हज़ारों उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति उनकी एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।”

ग़रीबों के मसीहा और ईमानदार प्रशासक

​ट्रस्ट के संयोजक डॉ. अब्दुल क़ुद्दूस हाशमी ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि अहमद हसन साहब ने कभी प्रचार की राजनीति नहीं की। उन्होंने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकारों में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए, विशेषकर पसमांदा समाज और बुनकरों के लिए उनके कार्य मील के पत्थर हैं।

​लखनऊ के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र नाथ सिंह यादव ने उन्हें याद करते हुए कहा, “मैंने अपने पूरे करियर में अहमद हसन जैसा ईमानदार मंत्री नहीं देखा। उन्होंने सरकारी अस्पतालों को मानकयुक्त बनाया और सुनिश्चित किया कि हर गरीब को मुफ्त और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं मिलें।”

मानवता की मिसाल

​जौनपुर के शिक्षाविद् डॉ. क़दीर ख़ान ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आज की राजनीति में अहमद हसन जैसे नेताओं की कमी खलती है, जिनके दरवाजे गरीबों के लिए 24 घंटे खुले रहते थे। उन्होंने अल्लामा इकबाल का शेर पढ़ते हुए उन्हें याद किया:

“हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पर रोती रहती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा।”

​अध्यक्षता कर रहे शारिक़ अलवी ने 1959 के पुलिस प्रशिक्षण के दिनों को याद करते हुए उनकी सत्यनिष्ठा और राष्ट्रीय भावना की प्रशंसा की।

ज़रूरतमंदों को राशन और कंबल वितरण

​अहमद हसन की जयंती के अवसर पर केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि सेवा कार्य भी किए गए। इकरा पब्लिक स्कूल, बिजनौर (लखनऊ) में कड़ाके की ठंड को देखते हुए ज़रूरतमंदों और ग़रीबों के बीच राशन और कंबलों का वितरण किया गया। ट्रस्ट के सदस्यों ने इसे अहमद हसन साहब की ‘ग़रीब-परवर’ विरासत को आगे बढ़ाने का एक छोटा सा प्रयास बताया।

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