टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश: रिकॉर्ड 6.90 लाख मरीजों की पहचान; जांच और इलाज में देश का अव्वल राज्य बना यूपी

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश ने टीबी (क्षय रोग) उन्मूलन की दिशा में एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘अधिकतम पहचान और त्वरित इलाज’ की रणनीति पर चलते हुए प्रदेश ने वर्ष 2025 में अपने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है। सरकार द्वारा निर्धारित 6.75 लाख मरीजों के लक्ष्य के मुकाबले 6.90 लाख नए मरीजों की पहचान कर उनका इलाज शुरू किया गया है।
तकनीक से मिली मजबूती: NAT टेस्टिंग में 100% की वृद्धि
टीबी की सटीक पहचान के लिए प्रदेश में आधुनिक मशीनों का जाल बिछाया गया है। स्मियर माइक्रोस्कोपी की तुलना में अधिक सटीक मानी जाने वाली नैट जांचों की संख्या दोगुनी हो गई है। वर्ष 2024 में जहां 13 लाख जांचें हुई थीं, वहीं 2025 में 27 लाख से अधिक संदिग्धों की जांच की गई। प्रदेश के 58 जिलों की 180 एक्स-रे मशीनों को फ्री ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) टूल से लैस किया गया है, जिससे प्रारंभिक चरण में ही टीबी का पता लगाना आसान हो गया है।
मृत्यु दर और नए मामलों में गिरावट
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर के अनुसार, व्यापक प्रयासों का परिणाम अब जमीन पर दिखने लगा है। 2015 के मुकाबले नए रोगियों की संख्या और मृत्यु दर दोनों में 17% की कमी दर्ज की गई है। ड्रग रजिस्टेंट (गंभीर टीबी) मरीजों के लिए उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वाधिक 5,367 मरीजों को ‘बीपालएम’ तकनीक से इलाज देकर नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्ष 2024 में प्रदेश की 7,191 ग्राम पंचायतों को आधिकारिक तौर पर ‘टीबी मुक्त’ घोषित किया गया है।
नि:क्षय मित्र: जनभागीदारी की मिसाल
टीबी मरीजों को गोद लेने की ‘नि:क्षय मित्र’ योजना में भी यूपी अग्रणी रहा है। बुलंदशहर में नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन ने अकेले 7,593 मरीजों को गोद लेकर सामाजिक जिम्मेदारी की अनूठी मिसाल पेश की है।
नेशनल टीबी टास्क फोर्स के वाइस चेयरमैन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि प्रति एक लाख जनसंख्या पर केसों की संख्या घटना एक शुभ संकेत है, लेकिन उन्मूलन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इस सक्रियता को बनाए रखना अनिवार्य है।




