महंत नरेंद्र गिरि मृत्यु मामला: सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी को दी जमानत, हाई कोर्ट का फैसला पलटा

Lucknkow Focus News Desk: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मामले के आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के पिछले आदेश को रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मामले का ट्रायल (मुकदमा) निकट भविष्य में पूरा होने की संभावना नहीं है। अदालत ने निम्नलिखित आधारों पर जमानत मंजूर की।
आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी 22 सितंबर, 2021 से जेल में है। कोर्ट ने माना कि सुनवाई पूरी होने में अभी लंबा समय लगेगा, इसलिए आरोपी को और अधिक समय तक हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है। पीठ ने उल्लेख किया कि अपीलकर्ता इस मामले में ‘मुख्य आरोपी’ प्रतीत नहीं होता है।
हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
इससे पहले, 14 अक्टूबर 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आद्या प्रसाद तिवारी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाई कोर्ट के उसी फैसले को पलटते हुए राहत प्रदान की है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट को जमानत रद्द करने का पूरा अधिकार होगा।
क्या है पूरा मामला?
साधुओं के सबसे बड़े संगठन के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि 20 सितंबर, 2021 को प्रयागराज के बाघंबरी मठ में फांसी पर लटके पाए गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
सीबीआई ने अपनी जांच में बताया था कि महंत जी अपने शिष्यों आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी द्वारा पैदा किए गए मानसिक तनाव के कारण बेहद परेशान थे। अपमान के डर से उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।
शुरुआत में यह मामला आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में चार्जशीट में हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120B) जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।
इस मामले में मुख्य रूप से आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी पर आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।