स्वस्थ मां, सुरक्षित बचपन की दिशा में तेज़ कदम, प्रदेश में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा विस्तार

Lucknow Focus News Desk: प्रदेश में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक, यूपीएमएससीएल के प्रबंध निदेशक, परिवार कल्याण, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक, आरसीएच के अपर निदेशक, बाल स्वास्थ्य के महाप्रबंधक सहित विभिन्न राज्य स्तरीय अधिकारी एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में जानकारी दी गई कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रदेश में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2023 के अनुसार वर्तमान में मातृ मृत्यु दर 141 प्रति एक लाख जीवित जन्म, नवजात मृत्यु दर 26 प्रति एक हजार तथा शिशु मृत्यु दर 37 प्रति एक हजार पर आ गई है।
महाप्रबंधक (बाल स्वास्थ्य) डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि यदि प्रसव के दौरान गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जाए तो लगभग 46 प्रतिशत मातृ मृत्यु, 40 प्रतिशत नवजात मृत्यु और 40 प्रतिशत मृत जन्म रोके जा सकते हैं। गंभीर रूप से बीमार नवजातों की बेहतर देखभाल से लगभग 30 प्रतिशत तक मृत्यु में कमी लाई जा सकती है, जबकि घर पर नियमित देखभाल एवं फॉलो-अप से 25 से 30 प्रतिशत शिशु मृत्यु कम की जा सकती है।
एफ़आरयू की संख्या 153 से बढ़ाकर 427
आपातकालीन प्रसव सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रदेश में 24×7 संचालित फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) की संख्या 153 से बढ़ाकर 427 कर दी गई है। इससे जटिल प्रसव मामलों में विशेषज्ञ सेवाएं समय पर उपलब्ध हो सकेंगी और रेफरल प्रणाली मजबूत होगी।
नवजात देखभाल सेवाओं का विस्तार
बैठक में अपर निदेशक डॉ. अजय गुप्ता ने विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCU) और न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट (NBSU) सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया। प्रीमैच्योर शिशुओं के उपचार के लिए सीपीएपी सुविधा बढ़ाने तथा इन इकाइयों में 24 घंटे जांच सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
इसके साथ ही ‘मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट’ (MNCU) मॉडल को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया, जिससे जन्म के बाद मां और शिशु को अलग रखने के बजाय संयुक्त देखभाल प्रदान की जा सके।
ई-कवच प्रणाली को किया जाएगा और सशक्त
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और निगरानी के लिए ई-कवच डिजिटल प्रणाली को और मजबूत किया जाएगा। प्रत्येक हाई-रिस्क गर्भवती महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी से जोड़ा जाएगा, ताकि समय पर उपचार और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित हो सके। कम वजन वाले नवजात शिशुओं की निगरानी के लिए ई-कवच में अलग डिजिटल ट्रैकिंग मॉड्यूल भी विकसित किया जाएगा।
त्रैमासिक सम्मेलन और फील्ड मॉनिटरिंग
अब हर तीन महीने में समीक्षा सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को आमंत्रित कर उनके अनुभव साझा किए जाएंगे। साथ ही अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली की समीक्षा तय मानकों के आधार पर की जाएगी। राज्य स्तरीय अधिकारी एवं सहयोगी संस्थाएं फील्ड भ्रमण कर सेवाओं की निगरानी भी करेंगी।
बैठक में जेएसआई संस्था को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। सरकार का लक्ष्य गर्भावस्था से लेकर जन्म के बाद तक मां और शिशु की स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर और गुणवत्तापूर्ण निगरानी सुनिश्चित करना है।




