बासी रोटी: सेहत के लिए वरदान या नुकसान? जानें क्या कहती हैं रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स की राय

Lucknow Focus News Desk: अक्सर हम रात की बची रोटियों को बासी समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन पोषण विज्ञान की दृष्टि से इसके कई चौंकाने वाले फायदे सामने आए हैं। हालिया शोध और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बासी रोटी (विशेषकर गेहूं की) सेहत के लिए कई मायनों में ताजी रोटी से बेहतर साबित हो सकती है।
क्या कहता है विज्ञान? (रिसर्च और रिपोर्ट्स)
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय जर्नल और एक्सपर्ट्स की स्टडीज के अनुसार, बासी रोटी में समय के साथ कुछ महत्वपूर्ण बदलाव होते हैं।
‘अमेरिकन जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन’ की रिपोर्ट के अनुसार, रोटी के बासी होने पर उसमें रेजिस्टेंट स्टार्च की मात्रा बढ़ जाती है। यह स्टार्च धीरे-धीरे पचता है, जिससे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है।
कई विदेशी स्वास्थ्य वेबसाइट्स का दावा है कि बासी रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स ताजी रोटी की तुलना में कम होता है। इसका मतलब है कि इसे खाने के बाद शरीर में ब्लड शुगर लेवल अचानक से नहीं बढ़ता।
बासी रोटी में मौजूद गुड बैक्टीरिया और फाइबर पेट की समस्याओं जैसे गैस, कब्ज और एसिडिटी में राहत पहुंचा सकते हैं।
प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
प्री-डायबिटिक और डायबिटीज के मरीजों के लिए सीमित मात्रा में बासी रोटी का सेवन शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। धीरे-धीरे डाइजेस्ट होने के कारण यह मेटाबॉलिज्म को स्थिर रखती है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देती। आयुर्वेद और कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, दूध के साथ बासी रोटी खाने से शरीर का तापमान (Body Temperature) नियंत्रित रहता है।
विशेषज्ञों की सावधानी और सुझाव
- न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बासी रोटी फायदेमंद है, लेकिन इसके सेवन के समय कुछ बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है।
- रोटी केवल 12 से 15 घंटे पुरानी ही होनी चाहिए। इससे ज्यादा समय होने पर उसमें फंगस या हानिकारक बैक्टीरिया पैदा हो सकते हैं।
- रोटी को साफ और सूखी जगह पर रखा जाना चाहिए ताकि उसकी नमी बरकरार रहे।
- आपको पुरानी पाचन संबंधी समस्या या गंभीर डायबिटीज है, तो अपनी डाइट में इसे शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी बदलाव से पहले पेशेवर चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।




