उत्तर प्रदेशलखनऊ

भारत की शिक्षित महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं : डॉ. कमर रहमान

Lucknow Focus News Desk: मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी लखनऊ की ओर से अंतरराष्ट्रीय  महिला दिवस के अवसर पर अकादमी के लाइब्रेरी हॉल, औरंगाबाद खालसा, बिजनौर रोड, लखनऊ में “महिलाओं की भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा” विषय पर एक शैक्षिक एवं वैचारिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया और महिलाओं की सामाजिक, शैक्षिक और राष्ट्रीय भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।

महिलाओं की भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा

इस अवसर पर मुख्य अतिथि आई.टी.आर.सी. की पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कमर रहमान ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति का अनुमान वहाँ की महिलाओं की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिक्षा अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शिक्षित महिलाएँ ही समाज को प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि विश्व का  पहला विश्वविद्यालय मोरक्को की एक महिला फातिमा  अल बैरी ने स्थापित किया था , जिसके कई सौ वर्षों बाद  ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय अस्तित्व में आए।

उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना काल में तैयार की गई फाइजर वैक्सीन के विकास में भी एक मुस्लिम महिला वैज्ञानिक और उनके पति ने  जर्मनी में किया  साथ हमारे देश  की डॉक्टर प्रज्ञा यादव ने  को वैक्सीन बेनजीस देश के  लोगों की जान बचाई आज वो वो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाई रोलॉजी  पुणे की अध्यक्ष हैं ,, जो विज्ञान की दुनिया में महिलाओं की उल्लेखनीय क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षित महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

महान महिलाओं के संघर्ष और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं

पुलिस इंटेलिजेंस विभाग की अधिकारी रीचा गौतमी ने अपने संबोधन में समाज सुधारकों ज्योति ब फूले और सावित्री बाई फूले की शैक्षिक सेवाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन संघर्ष के माध्यम से वंचित और पिछड़े समाज तक शिक्षा पहुँचाने का महान कार्य किया। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें  फातिमा  शेख और उनके पति उस्मान भाई जैसे साथियों का सहयोग न मिला होता तो उनका यह आंदोलन इतना प्रभावी नहीं बन पाता। आज आवश्यकता है कि हम फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले जैसी महान महिलाओं के संघर्ष और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं।

पुलिस विभाग की विदुषी विशाखा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को शिक्षा के साथ-साथ साहसी और आत्मविश्वासी बनाना भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे शब्दों और व्यवहार के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जिनसे महिलाओं का अपमान होता है, विशेष रूप से गाली-गलौज में प्रयुक्त अपमानजनक शब्दों पर रोक लगनी चाहिए।

पूर्व सीडीपीओ मंजू वर्मा ने कहा कि परिवार और समाज की प्रगति पुरुष और महिला दोनों के आपसी सहयोग से ही संभव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे रिक्शे के तीन पहिए होते हैं और यदि एक पहिया खराब हो जाए तो रिक्शा नहीं चल सकता, उसी प्रकार समाज की उन्नति के लिए पुरुष और महिला दोनों का मजबूत और संतुलित होना आवश्यक है।

प्रगति और समृद्धि के लिए सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक

इस अवसर पर डॉ. गीतांजलि, प्रो. डॉ. सफिया लोखंडे और डॉ. मनीराम सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक समय में महिलाओं की शिक्षा, आत्मविश्वास और सामाजिक जागरूकता देश की प्रगति और समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।

संगोष्ठी में स्टेट तकमील-उत-तिब मेडिकल कॉलेज के नूर हसन, रम्शा अफरोज, तारिक बिलाल, मोहम्मद फुरकान , तमन्ना, आसिया और फैज अली ने भी इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार और अनुभव प्रस्तुत किए।

अकादमी के महासचिव डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी ने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य समाज में महिलाओं की सकारात्मक भूमिका को उजागर करना, नई पीढ़ी को शिक्षा और जागरूकता के महत्व से परिचित कराना तथा राष्ट्रीय विकास में महिलाओं की भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित करना है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और आपसी सहयोग को बढ़ावा देते हैं।

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