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मौनी अमावस्या पर दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी

दूसरे नदी-सरोवरों के तटों पर भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने  किया स्नान

प्रयागराज (लखनऊ फोकस ब्यूरो)।

शनिवार को प्रयागराज के संगम तट पर लगभग दो करोड़ नौ लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में डुबकी लगाई। इस मौके पर प्रदेश की योगी सरकार ने ऋषि-मुनियों और श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा करवाई (देखें फोटो और वीडियो)। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि मौनी अमावस्या के रूप में मनाई जाती है। इस दिन दूसरे नदी-सरोवरों के तटों पर भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया।

स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र, अलीगंज, लखनऊ के ज्योतिषाचार्य एस.एस. नागपाल ने बताया कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं, इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने और कटु शब्दों को न बोलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है और तिल, तिल का तेल, आंवला, कम्बल आदि का दान करना चाहिए। जिनकी कुंडली में पित दोष है उनको पितरों को तर्पण आदि कर दान-दक्षिणा करने से पित दोष से मुक्ति मिलती है । प्रयाग में माघ माह की अमावस्या में त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है, क्योंकि इस दिन संगट तट और गंगा पर देवी-देवताओं का वास होता है।

 

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