उत्तर प्रदेश

एड्स के खिलाफ जंग में बड़ा बदलाव: अब एचआईवी मरीज ही संभालेंगे उन्मूलन की कमान, लखनऊ में बना रोडमैप

GIPA सम्मेलन में प्रो. सी.एम. सिंह बोले-मरीज केवल लाभार्थी नहीं, इस लड़ाई के सबसे मजबूत सिपाही हैं

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में एड्स उन्मूलन की रणनीति अब पूरी तरह बदलने जा रही है। अब एचआईवी प्रभावित लोग केवल इलाज पाने वाले ‘लाभार्थी’ नहीं रहेंगे, बल्कि वे इस लड़ाई के नीति-निर्धारण और निगरानी के केंद्र में होंगे। इसी क्रांतिकारी सोच के साथ आज लखनऊ में जीआईपीए (GIPA) यानी ‘ग्रेटर इन्वाल्वमेंट ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स’ सम्मेलन का आयोजन किया गया।

नीति निर्माण से निगरानी तक मरीजों का साथ

आरएमएल आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि एचआईवी मरीजों की सक्रिय भागीदारी के बिना एड्स मुक्त समाज का सपना अधूरा है। उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए प्रभावित समुदाय को निर्णय लेने वाली मेज पर बैठना होगा।

सभी 75 जिलों में ‘कम्युनिटी सिस्टम स्ट्रेंथनिंग ग्रुप’ का गठन

यूपीसैक्स (UPSACS) के संयुक्त निदेशक रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने एक बड़ी उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में ‘कम्युनिटी सिस्टम स्ट्रेंथनिंग ग्रुप’ (CSSG) बना दिए गए हैं। इन समूहों की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेंगे, लेकिन सामुदायिक प्रतिनिधि इसमें ‘सह-संयोजक’ की अहम भूमिका निभाएंगे। यह समूह सीधे जमीनी स्तर से फीडबैक लेकर जिला कोर कमेटी को सुझाव देगा, जिससे सरकारी योजनाओं की कमियों को दूर किया जा सके।

कलंक और भेदभाव के खिलाफ कानूनी सुरक्षा

सम्मेलन में सामाजिक बाधाओं पर भी चर्चा हुई। संयुक्त निदेशक डॉ. संजय सोलंकी ने कहा कि आज भी ‘सामाजिक कलंक’ इलाज की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। वहीं, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष कुमार ने जानकारी दी कि एचआईवी प्रभावितों को जिला स्तर पर निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध है। महिलाएं, दिव्यांग और अनुसूचित जाति/जनजाति के लोग इन विधिक प्रावधानों का लाभ उठा सकते हैं।

क्या है जीआईपीए (GIPA)?

यह एक वैश्विक सिद्धांत है जिसका मूल मंत्र है  “हमारे लिए, हमारे बिना, कुछ भी नहीं।” इसके तहत एचआईवी प्रभावित लोगों को सशक्त बनाया जाता है ताकि वे समाज में व्याप्त भेदभाव को कम कर सकें और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए सक्रिय भागीदार बन सकें।

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