उत्तर प्रदेश

बिजली महापंचायत में निजीकरण के विरोध में बड़ा ऐलान: जन आंदोलन और जेल भरो अभियान की घोषणा

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ आज राजधानी में आयोजित बिजली महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बिजली, रेल, सरकारी कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता एकजुट होकर व्यापक जन आंदोलन शुरू करेंगे। आंदोलन के अगले चरण में टेण्डर जारी होते ही सामूहिक जेल भरो अभियान चलाया जाएगा।

महापंचायत में ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री शिव गोपाल मिश्र, संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दर्शन पाल, उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक रमानाथ झा, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के संयोजक सुदीप दत्त, और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने एकजुट होकर निजीकरण का विरोध किया।

रेल, किसान और कर्मचारी संगठन एकजुट

शिव गोपाल मिश्र ने ऐलान किया कि “अगर उत्तर प्रदेश में बिजली का निजीकरण थोपा गया तो पूरे देश के रेल कर्मचारी जेल भरो आंदोलन में शामिल होंगे।” वहीं, डॉ. दर्शन पाल ने सभी किसान संगठनों की ओर से प्रदेश के बिजली कर्मचारियों को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।

27 लाख बिजली कर्मियों की 09 जुलाई को सांकेतिक राष्ट्रव्यापी हड़ताल

महापंचायत में यह भी निर्णय लिया गया कि 09 जुलाई को पूरे देश के 27 लाख बिजली कर्मचारी एक दिन की राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल करेंगे। इसकी तैयारी के तहत 02 जुलाई को देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे।

भ्रष्टाचार के आरोप और सीबीआई जांच की मांग

सभा में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। वक्ताओं ने कहा कि अवैध तरीके से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रान्ट थॉर्टन की मिलीभगत से गलत आंकड़े पेश किए गए और भ्रष्टाचार के जरिए आरएफपी डॉक्यूमेंट विद्युत नियामक आयोग को भेजे गए। आयोग ने इसे आपत्तियों के साथ लौटा दिया, जो भ्रष्टाचार के प्रमाण हैं।

महापंचायत ने मांग की कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच कराई जाए और निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए।

सैकड़ों संगठनों का समर्थन

सभा में राज्य कर्मचारी संगठनों के नेताओं सतीश पांडेय, शशि कुमार मिश्रा, एस.पी. तिवारी, हरिशरण मिश्रा, अमरनाथ यादव, सुरजीत सिंह निरंजन, अटेवा के विजय बंधु, शिक्षक नेता रीना त्रिपाठी ने निजीकरण के खिलाफ सामूहिक संघर्ष की घोषणा की।

किसान और कर्मचारी नेता

जयप्रकाश, डॉ. आशीष मित्तल, मुकुट सिंह, अनुज टिकारा, के.आर. यादव, अफीफ सिद्दीकी, प्रेमनाथ राय, अजहर सबा, अफलातून, संजय कुमार, भारत सिंह, शशिकांत आदि ने भी अपने विचार रखे।

राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के पदाधिकारियों सतनाम सिंह, अजय कुमार, बलबीर यादव, अवधेश कुमार यादव और अन्य ने संघर्ष के प्रस्ताव का समर्थन किया।

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