उत्तर प्रदेशलखनऊ

BBAU NSS शिविर: नुक्कड़ नाटक के जरिए दिया ‘बेटी पढ़ाओ’ का संदेश, स्वयंसेवकों ने जानी आयुष चिकित्सा की अहमियत

Lucknow Focus News Desk: बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाइयों द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का आज तीसरा दिन था। औरंगाबाद खालसा और जागीर क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने न केवल सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाई, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की।

नुक्कड़ नाटक: बेटियों की शिक्षा पर जोर

कार्यक्रम की शुरुआत एक प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक से हुई। स्वयंसेवकों ने औरंगाबाद खालसा क्षेत्र में बालिका शिक्षा और उनके अधिकारों के विषय पर नाटक प्रस्तुत किया। नाटक के जरिए ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि एक शिक्षित बेटी न केवल अपना भविष्य संवारती है, बल्कि पूरे समाज को सशक्त बनाती है।

मौलाना आज़ाद की दूरदर्शिता को किया याद

स्वयंसेवकों ने औरंगाबाद खालसा स्थित मौलाना आज़ाद मेमोरियल अकादमी का दौरा किया। यहाँ अकादमी के महासचिव डॉ. अब्दुल कुद्दूस हाशमी ने छात्रों को देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद के जीवन संघर्षों के बारे में बताया।

छात्रों ने जाना कि यूजीसी (UGC) और आईआईटी (IIT) जैसे संस्थानों की स्थापना में मौलाना आज़ाद की कितनी बड़ी भूमिका थी। डॉ. हाशमी ने कहा कि विकसित भारत के सपने को तभी साकार किया जा सकता है जब युवा शिक्षा के साथ आपसी भाईचारे को अपनाएं।

आयुष चिकित्सा और बुजुर्गों की सेवा

शिविर में स्वास्थ्य जागरूकता पर भी ध्यान दिया गया। स्टेट तकमील-उत-तिब कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. साफिया लोखंडे ने स्वयंसेवकों को आयुर्वेद, योग और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (AYUSH) के फायदों के बारे में जानकारी दी।

दिन का समापन एक नेक कार्य के साथ हुआ। एनएसएस स्वयंसेवकों ने एक ओल्ड एज होम का दौरा किया और वहां रह रहे बुजुर्गों को उनकी जरूरत और उपयोग की सामग्री वितरित की, जिससे बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान तैर गई।

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