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पश्चिम एशिया में गहराया युद्ध का संकट: कच्चे तेल में ‘आग’ से एशियाई बाजार धराशायी, $109 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

Lucknow Focus News Desk: पश्चिम एशिया (ईरान) में युद्ध विराम की वार्ताओं के विफल होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में हड़कंप मच गया है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा दिया है, जिसका सीधा असर मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों पर भारी गिरावट के रूप में देखा गया।

कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

आपूर्ति मार्ग बंद होने से ऊर्जा बाजार एक बार फिर अस्थिर हो गया है। जून डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड का भाव $1.11 बढ़कर $109.34 प्रति बैरल पर पहुँच गया है। गौर करने वाली बात यह है कि संघर्ष शुरू होने से पहले यह $70 के आसपास था। तेल की इन बढ़ती कीमतों ने भारत और जापान जैसे उन देशों की चिंता बढ़ा दी है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं।

एशियाई बाजारों में ‘ब्लैक ट्यूसडे’ जैसी स्थिति

महंगे तेल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण प्रमुख एशियाई सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

जापान: ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण निक्केई 225 में 1.1% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

हांगकांग और चीन: हैंग सेंग 0.7% और शंघाई कंपोजिट 0.2% टूटकर बंद हुए।

ऑस्ट्रेलिया: S&P/ASX 200 में भी 0.6% की सुस्ती रही।

दक्षिण कोरिया: विपरीत रुख अपनाते हुए कोस्पी 1% की बढ़त बनाने में सफल रहा।

बैंक ऑफ जापान (BOJ) का बड़ा फैसला

इस आर्थिक उथल-पुथल के बीच बैंक ऑफ जापान के मौद्रिक नीति बोर्ड ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 0.75% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। बैंक ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व के हालात अर्थव्यवस्था की विकास दर को धीमा कर सकते हैं।

वॉल स्ट्रीट और बॉन्ड मार्केट का हाल

अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। जहाँ S&P 500 ने 0.1% की बढ़त के साथ 7,137.91 का नया रिकॉर्ड बनाया, वहीं डाउ जोंस में मामूली गिरावट रही। कच्चे तेल की तेजी का असर बॉन्ड मार्केट पर भी दिखा और 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.33% पर पहुँच गई।

आगे क्या? निवेशकों की नजरें इन पर

फेड रिजर्व की बैठक: अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ईसीबी और बैंक ऑफ इंग्लैंड इस सप्ताह ब्याज दरों पर फैसला लेंगे।

टेक दिग्गजों के नतीजे: एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न जैसी बड़ी कंपनियों की अर्निंग्स रिपोर्ट बाजार की दिशा तय करेगी।

युद्ध विराम वार्ता: यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तो शेयर बाजारों में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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