बजट 2026-27: लखनऊ के व्यापारियों ने बुलंद की आवाज, वित्त मंत्री को भेजा सुझावों का पिटारा

Lucknow Focus News Desk: केंद्रीय बजट आने में अब महज कुछ ही दिन शेष हैं। लखनऊ के व्यापारिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट 2026-27 से देश के मध्यम और छोटे व्यापारियों को काफी उम्मीदें हैं। इसी सिलसिले में राजधानी के व्यापारियों ने एक अहम बैठक की, जिसमें कर प्रणाली को सरल बनाने और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए ‘विशाल मांग पत्र’ तैयार किया गया है।
ऐसे में व्यापारियों के प्रमुख संगठन ने अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की जटिल कर व्यवस्था को पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाना था। व्यापारियों का स्पष्ट मानना है कि यदि सरकार ‘व्यापार बढ़े देश बढ़े’ की भावना पर काम करे, तो न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि बाजार भी मजबूत होगा।
अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने बैठक को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह के माध्यम से और सीधे मेल कर वित्त मंत्री को अपना ज्ञापन पहले ही भेज दिया है। व्यापारियों का सबसे बड़ा प्रस्ताव ‘एक राष्ट्र एक कर’ की तर्ज पर ‘एक ट्रेड एक टैक्स’ की व्यवस्था लागू करना है।
व्यापारियों ने सरकार के सामने मांगों की जो फेहरिस्त रखी है, उसमें सबसे ज्यादा जोर जीएसटी (GST) की विसंगतियों को दूर करने पर है।
क्या है प्रमुख मांगे?
व्यापारियों की मांग है कि जीएसटी पंजीकरण की सीमा सेवाओं के लिए 50 लाख और वस्तुओं के लिए बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये की जाए।
छोटे और मध्यम व्यापारियों को राहत देने के लिए पार्टनरशिप फर्मों पर टैक्स दरों को कम किया जाए और पार्टनर्स को दिए जाने वाले वेतन को खर्च की कटौती में पूरी तरह शामिल किया जाए।
वर्तमान में टीडीएस की कई उलझाने वाली दरें हैं। व्यापारियों ने इसे केवल दो स्लैब (1% और 5%) में समेटने का सुझाव दिया है।
जीएसटी पोर्टल की गड़बड़ियों के कारण लगने वाली पेनल्टी और ब्याज को खत्म करने की मांग उठी है। साथ ही, पोर्टल पर दस्तावेज होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा भौतिक सत्यापन के नाम पर किए जाने वाले ‘उत्पीड़न’ को बंद करने की अपील की गई है।
ई-कॉमर्स बनाम स्थानीय बाजार
कोषाध्यक्ष देवेंद्र गुप्ता ने ई-कॉमर्स और ऑनलाइन व्यापार के मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन व्यापार पर एक विशेष ‘लेवी’ या अतिरिक्त कर लगाया जाए। उनका तर्क है कि बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी पूंजी और भारी छूट के दम पर पारंपरिक बाजार को खत्म कर रहे हैं। यदि ऑनलाइन बिक्री पर संतुलित कर नीति होगी, तभी स्थानीय छोटे दुकानदार स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
व्यापार के लिए सस्ता कर्ज
व्यापारियों ने सरकार से कमर्शियल लोन की ब्याज दरों को घटाकर 5 प्रतिशत करने की मांग की है। वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा ने कहा कि वर्तमान में ऊँची ब्याज दरों के कारण छोटा व्यापारी आर्थिक दबाव में है। यदि कर्ज सस्ता होगा, तो व्यापार का विस्तार होगा और नया रोजगार पैदा होगा।
सोने-चांदी की कीमतों पर चिंता
बैठक में सराफा व्यापारियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों के कारण ज्वेलर्स का वर्किंग कैपिटल (कार्यशील पूंजी) फंस गया है और ग्राहकों की खरीद क्षमता कम हुई है। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि छोटे ज्वेलर्स के लिए नीतिगत स्थिरता लाई जाए और उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाए।
सत्यापन और फर्जी फर्मों पर नकेल
अक्सर देखा जाता है कि फर्जी फर्मों के चक्कर में असली व्यापारियों को नोटिस और जांच का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों का सुझाव है कि पंजीकरण के वक्त ही पूर्ण सत्यापन किया जाए और आईटीसी (ITC) मिसमैच का नोटिस उसी महीने या उसी वित्तीय वर्ष में दिया जाए ताकि व्यापारी तुरंत सुधार कर सके।
बैठक में मौजूद रहे दिग्गज
इस महत्वपूर्ण चर्चा में चेयरमैन राजेंद्र कुमार अग्रवाल, पवन मनोचा, देवेंद्र गुप्ता, सतीश अग्रवाल, भारत भूषण गुप्ता, अरुण अवस्थी, सुमित गुप्ता, प्रियंक गुप्ता और नसीम अंसारी सहित दर्जनों पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। सभी ने एक सुर में कहा कि बजट ऐसा होना चाहिए जो “व्यापार, रोजगार और बाजार” तीनों को मजबूती दे।
व्यापारियों ने सरकार से उम्मीद जताई है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार मध्यम वर्गीय कारोबारियों की इन बुनियादी और व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेंगी।




