ऋषभ शेट्टी का सिनेमाई जादू: ‘कांतारा चैप्टर 1’ प्रीक्वल में कल्पना से परे जंगल की दुनिया

Lucknow Focus News Desk: पैन-इंडिया स्टार ऋषभ शेट्टी की हालिया रिलीज फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। यह फिल्म न सिर्फ कन्नड़ सिनेमा की पहचान को मजबूती दे रही है, बल्कि ऋषभ शेट्टी को एक ऐसे असाधारण फिल्म निर्माता (एक्टर, डायरेक्टर, राइटर) के रूप में भी स्थापित कर रही है, जिसने पर्दे पर कल्पना से परे की एक अनूठी दुनिया रच दी है।
‘कांतारा चैप्टर 1’ पिछली ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कांतारा’ (2022) का प्रीक्वल है, जो सिनेमाई दुनिया में एक दुर्लभ प्रयोग है और दर्शकों के बीच जबरदस्त जिज्ञासा पैदा कर रहा है।
प्रीक्वल की कहानी और अनप्रिडिक्टेबल दुनिया
‘कांतारा चैप्टर 1’ की कहानी 2022 की फिल्म की घटनाओं से कई साल पहले की है। यह ‘ईश्वर के मधुवन’ कहे जाने वाले एक घने और रहस्यमय जंगल ‘कांतारा’ के अंदरूनी घटनाक्रमों को दंतकथाओं से जोड़ने की कोशिश करती है।
फिल्म का मुख्य नायक बर्मे (ऋषभ शेट्टी) इसी जंगल के अंदर रहता है। वह बाहरी प्रभावशाली ताकतों से प्रकृति और जंगल के संसाधनों की रक्षा करने वाले एक आदिवासी नेता के रूप में उभरा है। बर्मे, जंगल और जमीन के रक्षक के रूप में अपने लोगों के अधिकारों की वकालत करता है।
फिल्म में राजा विजयेंद्र (जयराम) कुलशेखर (गुलशन देवैया) को नया शासक बना देते हैं, जो योग्य नहीं दिखता, जबकि उसकी बहन कनकवती (रुक्मिणी वसंत) अधिक समझदार है। कहानी तब मोड़ लेती है जब बर्मे, कनकवती को प्रभावित करने में कामयाब होता है और अपने समुदाय के अधिकारों को स्थापित करता है।
ऋषभ शेट्टी ने फिल्म के दृश्यों को इस तरह से अनप्रिडिक्टेबल बनाया है कि दर्शक अगले सीन का अनुमान नहीं लगा पाते। पर्दे पर सबकुछ जादू की तरह घटित होता है, जो फिल्म को एक अलग ही कायनात का एहसास देता है।
ऋषभ शेट्टी: अभिनेता, निर्देशक और लेखक का सफल मिश्रण
‘कांतारा चैप्टर 1’ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ऋषभ शेट्टी ने न केवल इसमें मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन और लेखन भी किया है। किसी एक व्यक्ति का इन तीनों विभागों पर इतनी कामयाबी से अधिकार जमाना सिनेमा जगत में कम ही देखने को मिलता है।
ऋषभ शेट्टी का भावनात्मक आवेग और तीव्रता जबरदस्त है। उन्होंने कहानी को पौराणिक गाथा का रूप देने की अद्भुत कला दिखाई है, जिससे दर्शक कहानी में गहरे उतर जाते हैं। अरविंद एस. कश्यप की सिनेमैटोग्राफी और प्रगति शेट्टी की कॉस्ट्यूम डिज़ाइन ने सदियों पुरानी कहानी के माहौल को सफलतापूर्वक जीवंत किया है।
हालांकि, समीक्षकों ने फिल्म में इमोशन के बदले एक्शन पर अधिक जोर और कुछ हास्य प्रसंगों को फिल्म की चुस्ती को हल्का करने वाला बताया है। इसके बावजूद, फिल्म की भव्यता और पौराणिक कथा को पर्दे पर उतारने का प्रयास इसे एक नायाब स्वरूप प्रदान करता है, जिससे दर्शक एक अनोखे संसार का सुख प्राप्त कर पाते हैं।




