उत्तर प्रदेश

2047 तक हर न्याय पंचायत में ‘सीएम मॉडल कम्पोजिट विद्यालय’, पिछली सरकारों की शिक्षा उपेक्षा पर बरसे बेसिक शिक्षा मंत्री

Lucknow Focus News Desk: विधानसभा में गूंजते शब्द, तेज़ लहज़ा और शिक्षा सुधार का बड़ा ऐलान। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने एलान किया कि 2047 तक उत्तर प्रदेश की हर न्याय पंचायत में ‘सीएम मॉडल कम्पोजिट विद्यालय’ होगा। ये विद्यालय प्री-प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा एक ही छत के नीचे, अत्याधुनिक संसाधनों और उच्च गुणवत्ता के साथ देंगे।

विधानसभा में विजन डाक्यूमेंट-2047 पर चर्चा के दौरान शिक्षा सुधार का बड़ा ऐलान

प्रत्येक जिले में निर्माणाधीन सीएम मॉडल कम्पोजिट विद्यालयों के बारे में मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय पर लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। ये स्कूल प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को एक ही परिसर में पढ़ाई का अवसर देंगे। वर्तमान में हर जिले में दो विद्यालयों का निर्माण शुरू है और हमारा अभियान है कि 2047 तक हर न्याय पंचायत में यह व्यवस्था हो।

मंत्री ने यह भी दोहराया कि नया भारत और नया उत्तर प्रदेश गढ़ने में बेसिक शिक्षा विभाग की भूमिका निर्णायक है। हमारे बच्चे ही 2047 के भारत की सबसे बड़ी उम्मीद हैं और उनकी शिक्षा ही हमारे भविष्य की सबसे ठोस नींव भी।

सत्र की शुरुआत में संदीप सिंह ने अपने विज़न को एक शेर से सजाया, जो पूरे हॉल में गूंज उठा। उन्होंने जब यह पढ़ा कि ‘टूटे हुए सपनों को जोड़ना है हमें, अधूरे सफ़र को मोड़ना है हमें, ये विद्यालय सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, ये राष्ट्र की आत्मा हैं, इन्हें गढ़ना है हमें’; तब तालियों की गड़गड़ाहट से सदन ने उनका स्वागत किया।

ड्रॉपआउट समाप्त कर 100% नामांकन लक्ष्य हासिल करना ही है हमारा संकल्प

इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि जिनके शासन में बच्चों को स्कूल तक लाने का प्रयास तक नहीं हुआ, जिनके दौर में न विद्यालयों में पेयजल की सुविधा थी, न शौचालय, न किताब, न ही फर्नीचर थे, वे आज शिक्षा सुधार पर सवाल कर रहे हैं। हमारी सरकार ने 2017 से ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ चलाकर 19 पैमानों पर 96% सफलता हासिल की है। अब हम हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि NEP 2020 के अंतर्गत शिक्षा को लर्निंग और प्रैक्टिकल नॉलेज केंद्रित बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि  प्राथमिक और उच्च प्राथमिक में नामांकन अनुपात 82.6%, अपर प्राथमिक में 83.97% है और ड्रॉपआउट दर 3.01% है। अब हमारी सरकार इस दर को बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रही है। ड्रॉपआउट को पूरी तरह खत्म करना है और ग्रॉस व मिड इनरोलमेंट रेशियो को 100% तक ले जाना। उन्होंने कहा कि 2017 से चल रहे स्कूल चलो अभियान के तहत इस वर्ष भी 27 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया है। आरटीई के अंतर्गत 2017 में जहां केवल 10,784 बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिला था, वहीं 2024-25 में यह संख्या 4,58,000 से अधिक हो गई है।

Also Read: छात्रों को मिला विधानसभा जाने का मौका, मंत्री संदीप सिंह ने दिए उनके हर सवाल का जवाब

Related Articles

Back to top button