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Arthritis in Children: अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं आर्थराइटिस, बच्चे भी हो रहे हैं शिकार, जानें इसके लक्षण और कारण

Lucknow Focus News Desk:  आर्थराइटिस (गठिया) का नाम सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में बुजुर्गों की तस्वीर आती है। लेकिन बदलते दौर में यह धारणा गलत साबित हो रही है। पिछले कुछ दशकों में जहाँ 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में इसके मामले बढ़े हैं, वहीं अब बच्चे भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बच्चों में होने वाले इस गठिया को जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) कहा जाता है।

अक्सर माता-पिता बच्चों के जोड़ों या कलाई के दर्द को खेल-कूद की सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में हर 1,000 में से 1 बच्चा इस समस्या से पीड़ित हो सकता है। यह 16 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाला सबसे आम आर्थराइटिस है।

जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) क्या है और क्यों होता है?

यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorder) है। इसमें बच्चे का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) भ्रमित होकर शरीर की अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं और जोड़ों पर हमला करने लगता है। इससे जोड़ों में अत्यधिक सूजन और दर्द पैदा होता है।

चिकित्सकों के अनुसार, इम्यून सिस्टम के इस तरह व्यवहार करने का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके पीछे आनुवंशिकता (Genetics) और पर्यावरणीय कारक (Environmental Factors) जिम्मेदार हो सकते हैं।

इन 5 बड़े लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बच्चों में आर्थराइटिस का दर्द हमेशा बहुत तेज नहीं होता, इसलिए इन शुरुआती संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

  1. सुबह के समय अकड़न: सोकर उठने के बाद जोड़ों में जकड़न होना या बच्चे का लंगड़ाकर चलना।

  2. सूजन और लालिमा: घुटने, टखने, कलाई या उंगलियों के जोड़ों में सूजन दिखाई देना।

  3. अंगों का कम इस्तेमाल: दर्द के कारण किसी एक हाथ या पैर का इस्तेमाल कम करना।

  4. थकान और बुखार: हल्का बुखार रहना, लगातार थकान महसूस होना और भूख कम लगना।

  5. त्वचा पर चकत्ते: कुछ मामलों में बुखार के साथ त्वचा पर रैशेज या लिम्फ नोड्स में सूजन होना।

महत्वपूर्ण नोट: यदि ये लक्षण 6 सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार बने रहते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

समय पर इलाज न मिलने के खतरे

यदि जुवेनाइल आर्थराइटिस की सही समय पर पहचान न हो, तो यह केवल जोड़ों तक सीमित नहीं रहता:

  • आंखों पर असर: इसके कारण आंखों की अंदरूनी परत में सूजन आ सकती है, जिससे दृष्टि (Eyesight) प्रभावित होने का खतरा रहता है।

  • शारीरिक विकास में बाधा: यह हड्डियों के विकास को प्रभावित करता है, जिससे बच्चे की हाइट या ग्रोथ रुक सकती है।

  • स्थाई विकलांगता: जोड़ों को हमेशा के लिए नुकसान पहुंच सकता है, जिससे जीवनभर चलने-फिरने में असमर्थता हो सकती है।

इलाज और बचाव

समय पर डायग्नोसिस होने से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। इसके उपचार में सूजन और दर्द कम करने वाली दवाएं (Anti-inflammatory drugs) दी जाती हैं। दवाओं के साथ-साथ विशेषज्ञों द्वारा बच्चे की डाइट, फिजियोथेरेपी और सक्रिय जीवनशैली (Active Lifestyle) में सुधार की सलाह दी जाती है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाने के लिए है। किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर (Pediatric Rheumatologist) से परामर्श लें।

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