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राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा: अमित शाह ने बताया राष्ट्रभक्ति का कर्तव्य, नेहरू और विपक्ष पर उठाए सवाल

Lucknow Focus News Desk: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को राज्यसभा में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में इस राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक भूमिका का विस्तार से जिक्र किया, साथ ही विपक्ष (इंडिया गठबंधन) पर तीखे हमले किए।

वंदे मातरम: राष्ट्रभक्ति की भावना

गृह मंत्री शाह ने चर्चा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा वंदे मातरम पर चर्चा की जरूरत जब वंदे मातरम बना था, तब भी थी, आजादी के समय भी थी, आज भी है और 2047 में जब आधुनिक भारत होगा, तब भी रहेगी। क्योंकि वंदे मातरम में कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की भावना है।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्हें आज वंदे मातरम पर चर्चा की वजह समझ नहीं आ रही, उन्हें नए सिरे से सोचने की जरूरत है।

विपक्ष पर निशाना और नेहरू की भूमिका

अमित शाह ने कांग्रेस के एक पुराने फैसले का जिक्र करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। शाह ने कांग्रेस के 1937 के अधिवेशन में वंदे मातरम के आखिरी चार छंदों के इस्तेमाल को रोके जाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने इस फैसले में पंडित नेहरू की भूमिका पर भी कई सवाल खड़े किए।

गृह मंत्री ने इंडिया गठबंधन पर सीधा आरोप लगाया कि जब भी संसद में वंदे मातरम का गान होता है, तब उसके कई सदस्य सदन से बाहर चले जाते हैं, जबकि भाजपा के सभी नेता खड़े होकर इसका उचित सम्मान करते हैं।

मातृभूमि का महिमामंडन

शाह ने वंदे मातरम के मूल भाव को समझाते हुए कहा कि इसकी उद्घोषणा भले ही 150 साल पहले बंकिम बाबू ने की हो, लेकिन इसका भाव सदियों पुराना है। उन्होंने कहा भगवान राम ने कहा था माता और मातृभूमि ईश्वर से भी बड़ी होती है। मातृभूमि का महिमामंडन प्रभु श्रीराम ने किया, शंकराचार्य ने किया और आचार्य चाणक्य ने भी किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुलामी के कालखंड में ‘वंदे मातरम’ रोशनी की तरह था।

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