अयोध्या में आध्यात्मिक उत्सव: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम यंत्र की स्थापना कर रचा इतिहास

Lucknow Focus News Desk: आज चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर अयोध्या का भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंदिर के द्वितीय तल के गर्भगृह में ‘अभिजीत मुहूर्त’ के दौरान विधि-विधान से श्रीराम यंत्र की स्थापना और पूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे।
राष्ट्रपति का आगमन और स्वागत
राष्ट्रपति मुर्मू सुबह 11:00 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां उनका पारंपरिक अंदाज में भव्य स्वागत हुआ। उन्होंने जगतगुरू आद्य शंकराचार्य द्वार से रामनगरी में प्रवेश किया। राष्ट्रपति ने सुबह 11:55 बजे शुभ मुहूर्त में श्रीराम यंत्र की स्थापना की। लगभग 4 घंटे अयोध्या में प्रवास के बाद वे दोपहर 3:15 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।
आयोजन के मुख्य आकर्षण
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कार्यक्रम की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि: केरल की सुप्रसिद्ध धर्मगुरु माता अमृतानंदमयी (अम्मा) अपने 1,000 भक्तों के साथ इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनीं।
सहभागिता: मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले 6,000 लोगों में से लगभग 2,000 प्रतिनिधि और 1984 से मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवक इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
दर्शन व्यवस्था: राष्ट्रपति की सुरक्षा के मद्देनजर आम श्रद्धालुओं के लिए कुछ समय दर्शन बंद रहे, लेकिन ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु देर रात तक दर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
अयोध्या प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। जिले को 13 जोन और 37 सेक्टर में विभाजित किया गया है। कुल 3,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें 18 एसपी/एएसपी, 33 सीओ, 130 निरीक्षक और 1,800 आरक्षी शामिल हैं। 18 मार्च से ही भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है और रूट डायवर्जन आज शाम 5 बजे तक लागू रहेगा।
श्रीराम यंत्र का महत्व
मंदिर के द्वितीय तल पर स्थापित यह यंत्र आध्यात्मिक और वास्तुशास्त्रीय ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। यह अनुष्ठान मंदिर के निर्माण कार्य की पूर्णता और उसकी पवित्रता को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।




