लखनऊ

विश्व फोटोग्राफी दिवस: लखनऊ कला महाविद्यालय में फोटोग्राफी का समृद्ध इतिहास और भव्य प्रदर्शनी

Lucknow Focus News Desk: विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर, लखनऊ के प्रतिष्ठित कला एवं शिल्प महाविद्यालय में फोटोग्राफी की समृद्ध विरासत को दर्शाती एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स फ़ोटोग्राफ़िक सोसाइटी (CAPS) द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने किया।

कला महाविद्यालय और फोटोग्राफी का ऐतिहासिक संबंध

कला एवं शिल्प महाविद्यालय, जो कि देश के चार प्रमुख कला संस्थानों में से एक है, का फोटोग्राफी से गहरा और पुराना संबंध है। वरिष्ठ कलाकार और पूर्व प्रधानाचार्य जय कृष्ण अग्रवाल के अनुसार, 1932 में ललित मोहन सेन द्वारा स्थापित ‘यू.पी. अमेच्योर फोटोग्राफिक एसोसिएशन’ का केंद्र यही महाविद्यालय था। हालांकि उस समय फोटोग्राफी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थी, फिर भी सेन के प्रयासों से यहाँ एक सुव्यवस्थित डार्करूम और स्टूडियो स्थापित किया गया, जिसने कई छात्रों को इस विधा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

उस दौर में, लीथो प्रोसेस फोटो-मैकेनिकल विभाग के प्रवक्ता हीरा सिंह बिष्ट ने फोटोग्राफी की केमिस्ट्री और डार्करूम प्रक्रियाओं में छात्रों को प्रशिक्षित किया। जय कृष्ण अग्रवाल बताते हैं कि 1957 में जब उन्होंने खुद इस कॉलेज में दाखिला लिया, तब उनके अध्यापक प्रो. एस.बी. दत्ता ने उन्हें फोटोग्राफी सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उसी समय के छात्र डी.एन. जोशी जैसे प्रयोगवादी छायाकारों ने सोलेराइजेशन, टोनल सेपरेशन जैसी तकनीकों में महारत हासिल की और अपने ज्ञान को दूसरों के साथ साझा किया।

सोसाइटी का पुनरुत्थान और प्रदर्शनी

1950 के दशक में स्थापित कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स फ़ोटोग्राफ़िक सोसाइटी (CAPS), जो 1970 के दशक के अंत में निष्क्रिय हो गई थी, को 2020 में प्रोफेसर अतुल हुंडू के मार्गदर्शन में फिर से शुरू किया गया। यह सोसाइटी आज फोटोग्राफी के माध्यम से कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

‘व्हिसपर्स ऑफ़ लाइट – सीज़न 5’ नामक इस प्रदर्शनी में 150 से अधिक रचनात्मक तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। इनमें अभिनव श्रीवास्तव, अभिषेक पटवा, अमित यादव और अनुराग स्वरूप जैसे 25 से अधिक प्रतिभागियों की कृतियां शामिल थीं। प्रदर्शनी में क्रिएटिव, कमर्शियल, लैंडस्केप और पोर्ट्रेट शैली की तस्वीरों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया।

विशेष रूप से, इस अवसर पर पुराने और एंटीक कैमरों की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने सभी का ध्यान खींचा।

आगे के कार्यक्रम

प्रदर्शनी के साथ-साथ, 17 अगस्त से आयोजित ‘फोटोवॉक’ में खींची गई तस्वीरों का स्लाइड शो प्रतिदिन शाम 5:30 से 6:30 बजे तक प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल फोटोग्राफी को एक कला के रूप में मनाता है, बल्कि CAPS के सभी पूर्व और वर्तमान सदस्यों के योगदान को भी सम्मान देता है, जिन्होंने इसकी पहचान को आकार दिया है।

प्रिंसिपल डॉ. रतन कुमार ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की और मंत्री असीम अरुण ने ऐसे आयोजनों को रचनात्मक विधाओं के प्रचार-प्रसार के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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