उत्तर प्रदेशलखनऊ

भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम: लखनऊ में विज्ञान पत्रिका ‘क्षितिज विभा’ का भव्य विमोचन

Lucknow Focus News Desk: स्वदेशी विज्ञान आंदोलन को समर्पित संस्था विज्ञान भारती (विभा) की क्षेत्रीय इकाई ‘अवध विज्ञान भारती’ ने अपनी नवीन लोकप्रिय विज्ञान पत्रिका ‘क्षितिज विभा’ के प्रवेशांक का भव्य विमोचन किया। शनिवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI) के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में विज्ञान, आध्यात्म और राष्ट्र निर्माण के अंतर्संबंधों पर गहरा विमर्श किया गया।

प्रमुख अतिथि और उद्घाटन

  • मुख्य अतिथि: ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश।
  • विशिष्ट अतिथि: पवन सिंह चौहान (MLC) एवं डॉ. भृगु नाथ सिंह (कुलपति, RGNAU)।
  • अध्यक्षता: डॉ. ए. के. शसने, निदेशक, NBRI।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के संबोधन के मुख्य बिंदु

उपमुख्यमंत्री ने पत्रिका की सराहना करते हुए आधुनिक तकनीक को भारतीय जड़ों से जोड़ने पर बल दिया।

  • ज्ञान की भूमि: उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विज्ञान और दर्शन का केंद्र रहा है। ‘क्षितिज विभा’ आचार्य नागार्जुन जैसे प्राचीन वैज्ञानिकों और आधुनिक अनुसंधान के बीच सेतु का काम करेगी।
  • आध्यात्म और विज्ञान: पाठक ने कहा कि जो शक्ति ब्रह्मांड चला रही है, वही हमारे भीतर है। युवाओं को प्रयोगशालाओं के साथ-साथ वेद और उपनिषद भी पढ़ने चाहिए।
  • रक्षा तकनीक: उन्होंने लखनऊ में बन रही ब्रह्मोस मिसाइल का उदाहरण देते हुए इसकी तुलना महाराज दशरथ के ‘शब्दभेदी बाण’ से की, जो सटीकता का प्राचीन प्रमाण है।

पत्रिका की विशेषताएं और संपादन मंडल

पत्रिका के प्रधान संपादक सुविख्यात वैज्ञानिक डॉ. चन्द्र मोहन नौटियाल ने बताया कि ‘क्षितिज विभा’ का उद्देश्य अवध क्षेत्र के वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को वैश्विक पटल पर लाना और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है।

संपादन टीम:

  • प्रधान संपादक: डॉ. चन्द्र मोहन नौटियाल।
  • संपादक: राजकमल श्रीवास्तव एवं डॉ. रजनीश चतुर्वेदी।
  • सह-संपादक: डॉ. अरविन्द माथुर, डॉ. पुनीत कुमार, डॉ. वी.पी. सिंह, डॉ. विनय कुमार सिंह, डॉ. नीरज कुमार एवं डॉ. निमिष कपूर।

प्रवेशांक के प्रमुख लेखों पर एक नज़र

पत्रिका में प्राचीन विरासत से लेकर भविष्य की तकनीक (AI) तक को समेटा गया है।

  1. प्राचीन विज्ञान: आचार्य नागार्जुन के रसायन विज्ञान और शून्यवाद पर डॉ. विनय कुमार का लेख।
  2. भू-विरासत: भारत के करोड़ों वर्ष पुराने भू-वैज्ञानिक स्थलों पर डॉ. निमिष कपूर की प्रस्तुति।
  3. पर्यावरण एवं संस्कृति: गंगा के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व पर डॉ. वेंकटेश दत्ता और नदियों के सभ्यतागत विकास पर प्रो. एम.जी. ठक्कर के शोधपूर्ण लेख।
  4. आधुनिक तकनीक: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग पर क्रमशः डॉ. नीरज कुमार और डॉ. सी.एम. नौटियाल के विचार।
  5. विज्ञान साहित्य: पंकज प्रसून की विज्ञान कविताएं और डॉ. रजनीश चतुर्वेदी का ‘विज्ञान से राष्ट्र निर्माण’ पर लेख।

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