उत्तर प्रदेश

UP News: बिना रजिस्ट्रेशन नहीं चलेंगे जिम और स्वीमिंग पूल, प्रशासन की नई गाइडलाइन जारी

Lucknow Focus News Desk: वृंदावन में हुए दर्दनाक नाव हादसे (जिसमें 16 श्रद्धालुओं की जान गई) से सबक लेते हुए जिला प्रशासन ने अब शहर के सभी निजी जिम और स्वीमिंग पूल (तरणताल) पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र और खेल अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना वैध पंजीकरण और कड़े सुरक्षा मानकों के अब कोई भी जिम या पूल संचालित नहीं हो सकेगा।

‘गणेशरा स्टेडियम’ में हुई बड़ी बैठक

बुधवार को स्वर्गीय मोहन पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित बैठक में 38 संचालकों ने हिस्सा लिया। जिला खेल अधिकारी राकेश यादव ने बताया कि खेल विभाग अब पंजीकरण से पहले मानकों का भौतिक परीक्षण (Physical Audit) करेगा। अग्निशमन (Fire Safety) और फर्स्ट एड (First Aid) की सुविधा होने पर ही लाइसेंस जारी होगा।

स्वीमिंग पूल संचालकों के लिए ‘मस्ट-फॉलो’ गाइडलाइन

प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से निम्नलिखित नियम अनिवार्य किए हैं।

  • फिल्टर प्लांट का होना अनिवार्य है और पानी की शुद्धता नियमित जांचनी होगी।
  • कृत्रिम सांस लेने के उपकरण और ऑक्सीजन सिलेंडर पूल पर हर समय मौजूद होने चाहिए।
  • पूल की गहराई कितनी है, इसका स्पष्ट बोर्ड लगा होना चाहिए।
  • ट्रेंड लाइफगार्ड्स और स्वीमिंग एक्सपर्ट्स की तैनाती जरूरी है। उनके नाम और संस्था का विवरण रजिस्टर में दर्ज होगा।
  • पूल के किनारों (Deck) की टाइल्स खुरदुरी होनी चाहिए ताकि कोई फिसल कर न गिरे।
  • पास के डॉक्टर और अस्पताल के फोन नंबर और दूरी का बोर्ड लगाना अनिवार्य है।
  • बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम होने चाहिए।

लाइसेंस और शुल्क का ब्योरा

  • वार्षिक शुल्क: जिम और तरणताल के लिए ₹15,000 वार्षिक शुल्क तय किया गया है (बैंक ड्राफ्ट के जरिए)।
  • नवीनीकरण: हर साल मार्च में रिन्यूअल के लिए आवेदन करना होगा, अन्यथा लाइसेंस रद्द माना जाएगा।
  • जवाबदेही: पूल में किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर संचालक सीधे तौर पर जिम्मेदार होगा।

जिम संचालकों के लिए भी कड़े निर्देश

सिर्फ स्वीमिंग पूल ही नहीं, बल्कि जिम संचालकों को भी मानकों के अनुरूप मशीनों के रखरखाव और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जो भी संचालक तय समय सीमा में मानकों को पूरा नहीं करेगा, उसका संस्थान सील कर दिया जाएगा।

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