लखनऊ

बीबीएयू में ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव’ का आयोजन, ‘देवनागरी लिपि का मानकीकरण’ पर हुई कार्यशाला

Lucknow Focus News Desk: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025’ के तहत सोमवार को एक खास हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय ‘देवनागरी लिपि का मानकीकरण’ था, जिसमें छात्रों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

क्या कहा विशेषज्ञों ने?

कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय महिला महाविद्यालय, सीतापुर के प्राचार्य डॉ. सर्वेश कुमार मिश्र मौजूद थे। उन्होंने देवनागरी लिपि के इतिहास और विकास के बारे में विस्तार से बताया। डॉ. मिश्र ने कहा कि आज हम जिस देवनागरी लिपि का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह 12वीं-13वीं शताब्दी की लिपि का ही विकसित रूप है।

उन्होंने यह भी बताया कि 19वीं और 20वीं शताब्दी में हिंदी साहित्य सम्मेलन और काशी नागरी प्रचारिणी सभा जैसी संस्थाओं के प्रयासों से देवनागरी लिपि एक अखिल भारतीय लिपि के रूप में विकसित हुई। डॉ. मिश्र का मानना है कि देवनागरी ही एकमात्र ऐसी लिपि है जो भारत की सभी भाषाओं को जोड़कर राष्ट्रीय एकता का मजबूत माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षक और शोधार्थी मिलकर इस लिपि को और भी सरल बनाने पर काम करें।

यह कार्यशाला हिंदी प्रकोष्ठ, बीबीएयू द्वारा आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक (राजभाषा) डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने किया।

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