उत्तर प्रदेश

‘140 करोड़ देशवासियों के हित में ऐतिहासिक फैसला’, जातिगत जनगणना पर सीएम योगी और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना कराने के फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है। केंद्रीय कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति द्वारा इस निर्णय को स्वीकृति देने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी दलों ने इस कदम का समर्थन किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा 140 करोड़ देशवासियों के समग्र हित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जातिगत जनगणना कराने का निर्णय अभूतपूर्व एवं स्वागत योग्य है। यह वंचित, पिछड़े और उपेक्षित वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं में भागीदारी दिलाने की दिशा में निर्णायक पहल है। सीएम योगी ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए इसे “सामाजिक न्याय और डाटा-आधारित सुशासन” की दिशा में एक मील का पत्थर बताया।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जातिगत जनगणना के फैसले को देश के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में अहम कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे “देश में एक नई ऊर्जा का संचार होगा, जो विकसित भारत की दिशा में सहायक सिद्ध होगी।” उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहते हुए भी कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया।

दशकों की उपेक्षा का अंत: ब्रजेश पाठक

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित समाज के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने कहा कि जातिगत आंकड़े लोकतंत्र को मजबूत करेंगे और नीति निर्माण में पारदर्शिता तथा न्याय सुनिश्चित करेंगे।

भाजपा के सहयोगी दलों ने भी जातिगत जनगणना के निर्णय का समर्थन किया है। अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने इसे “वंचित वर्गों के हक में लिया गया फैसला” बताया और कहा कि उनकी पार्टी ने सड़क से संसद तक लगातार इसकी वकालत की है।

सुभासपा के मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा यह फैसला सिर्फ जनगणना नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की नींव है। निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद ने भी फैसले की सराहना करते हुए कहा कि मछुआरा समाज प्रधानमंत्री का आभारी है।

जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से आई प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि यह मुद्दा केवल जनगणना तक सीमित नहीं, बल्कि नीति निर्धारण, योजनाओं के क्रियान्वयन और हाशिए पर खड़े समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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