Lucknow: न्याय की खोज और मुस्कान ने दिया समाज को बड़ा संदेश, बच्चों की प्रतिभा ने छुआ दिल

Lucknow Focus News Desk: एक ओर इंसाफ की लड़ाई की गूंज थी, तो दूसरी ओर एक छोटी बच्ची की मासूम मगर मजबूत आवाज़ जो लिंग भेद के खिलाफ खड़ी थी। मदर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित चबूतरा थिएटर फेस्टिवल सीज़न 9 में सोमवार को कोटवा वार्ड नंबर 10, बक्शी का तालाब में हुए नाटकों ने दर्शकों को भावुक कर दिया और साथ ही गहरी सामाजिक चेतना भी जगाई।

20 दिन की मेहनत का रंगमंच पर असरदार प्रदर्शन
20 दिवसीय थिएटर वर्कशॉप के तहत “चबूतरा थिएटर पाठशाला” में तैयार किए गए दो नाटकों का मंचन हुआ “न्याय की तलाश” और “एक मुस्कान”। इन प्रस्तुतियों ने समाज के दो बेहद अहम मुद्दों मजदूरों के अधिकार और लिंग समानता को मंच पर बेहद प्रभावशाली तरीके से पेश किया।

“न्याय की तलाश” ने बताया: अन्याय के खिलाफ मिलकर लड़ना ही असली हिम्मत
इस नाटक की कहानी एक फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की है, जिनके अधिकारों को फैक्ट्री मालिक सेठ धनराज द्वारा लगातार कुचला जाता है। जब मजदूरों का प्रतिनिधि राघव, अपनी पत्नी सीता के भरोसे और साथी नीलिमा वकील के साथ, इंसाफ के लिए आवाज उठाता है, तो धीरे-धीरे पूरा गांव उसके साथ खड़ा हो जाता है।
नाटक का संदेश था “अपने अधिकारों के लिए अगर आप आवाज नहीं उठाएंगे, तो इंसाफ कभी नहीं मिलेगा।” कोर्ट तक पहुंची यह लड़ाई अंततः मजदूरों की जीत और धनराज को मिली सजा पर खत्म होती है।

कलाकारों की प्रमुख भूमिकाएं:
- राघव – अनूप जायसवाल
- सीता – शिखा वाल्मीकि
- वकील नीलिमा – नीलिमा चौधरी
- सेठ धनराज – लकी गौतम
अन्य भूमिकाओं में – आर्यन गौतम, युवराज कुमार, रौनक कुमार, हर्षित चौधरी, पलक कनौजिया, पिंकी कनौजिया, अंश कुमार, सुमित कनौजिया, नैनसी आदि।
लेखन और निर्देशन: मोहम्मद अमन
कार्यशाला निर्देशक: महेश चंद्र देवा
“एक मुस्कान” ने दी बेटियों की बराबरी का सबक
दूसरे नाटक में 8 वर्षीय मुस्कान की कहानी थी, जो अपनी दादी को यह समझाने की कोशिश करती है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। जहाज उड़ाने से लेकर डॉक्टर बनने तक हर क्षेत्र में बेटियां कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं।
नाटक में यह दिखाया गया कि कैसे एक मासूम लड़की लिंग जाँच जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ खड़ी होती है और अपने साहस से दादी को भी अपनी सोच बदलने पर मजबूर कर देती है।
मुख्य कलाकार:
- मुस्कान – अनुष्का
- दादी – सानिया
- माँ – अंशिका
- पिता – श्रीकांत
- चाचा – राजवीर
- डॉक्टर – रेचल,
- प्रिंसिपल – सोनाली
- टुन्न – शिवांशु
- लेखन और निर्देशन: श्रीकांत गौतम
- कार्यशाला संयोजन: किरन लता और महेश चंद्र देवा
सम्मानित अतिथियों की मौजूदगी से बढ़ा कार्यक्रम का गौरव
नाट्य समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि बीकेटी के चेयरमैन गणेश कुमार रावत ने की। उनके साथ कोटवा ग्राम प्रधान एडवोकेट रोहित कनौजिया, समाजसेवी ओपी सिन्हा और पूर्व जनप्रतिनिधियों समेत कई गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रमुख अतिथि:
- शहज़ाद अहमद (पूर्व ब्लॉक प्रमुख),
- राम आधार यादव (पूर्व उप ब्लॉक प्रमुख),
- अरुष सिंह (पूर्व चेयरमैन),
- दिलीप गुप्ता,
- सुनील यादव,
- संतोष भारती,
- संजय यादव,
- गया प्रसाद,
- आशा बहु आशा देवी,
- प्रमोद गुप्ता,
- डॉ. अवधेश यादव,
- राम नरेश सिंह सहित कई अन्य लोग।
- तकनीकी सहयोग और प्रस्तुति
- मंच संचालन: महेश चंद्र देवा
- फोटोग्राफी और वीडियो: अजय कुमार
- मंच व्यवस्था: पंकज कश्यप
- संगीत: मोहम्मद अमन और श्रीकांत गौतम
- लाइटिंग: सैफ
- मेकअप: शिखा वाल्मीकि और ह्रितिक शाक्य
- मंच परे: अनुराग जॉन, शिवा और अंकित
कार्यक्रम का समापन “तु ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पर यकीन कर” गीत और बच्चों के मनमोहक नृत्य के साथ हुआ।
मदर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित यह रंगमंचीय पहल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की एक सार्थक कोशिश है। गांव के बच्चों और युवाओं ने जिस आत्मविश्वास और समझदारी से मंच पर अपनी बात रखी, वह समाज को सोचने पर मजबूर कर गई।
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