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सावधान! कुत्ते के काटने पर कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? रेबीज से बचने के लिए तुरंत अपनाएं ये ‘फर्स्ट एड’

Lucknow Focus News Desk: कुत्ते का काटना केवल एक चोट नहीं, बल्कि एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। भारत में रेबीज के मामले चिंताजनक हैं, और सबसे डरावनी बात यह है कि एक बार रेबीज का संक्रमण फैल जाए, तो इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है। ऐसी स्थिति में आपकी थोड़ी सी समझदारी जान बचा सकती है, तो वहीं एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

आइए जानते हैं कि कुत्ते के काटने पर तुरंत क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना जरूरी है।

कुत्ता काटते ही सबसे पहले क्या करें?

जैसे ही कोई कुत्ता (चाहे पालतू हो या आवारा) आपको काटे या खरोंच मारे, बिना घबराए ये कदम उठाएं।

घाव को तुरंत बहते हुए नल के पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक धोएं। साबुन में मौजूद तत्व रेबीज वायरस की बाहरी परत को तोड़ने में मदद करते हैं।

सफाई करते समय कोमलता बरतें, घाव को जोर से रगड़ें नहीं।

धोने के बाद घाव पर कोई एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम लगाएं।

रेबीज के घाव को खुला रखना चाहिए ताकि वह ऑक्सीजन के संपर्क में रहे। इसे पट्टी से ढंकने या टांके लगवाने की गलती न करें।

ये 5 लापरवाहियां पड़ सकती हैं भारी

घरेलू नुस्खे अपनाना: घाव पर लाल मिर्च, तेल, हल्दी, चूना या मिट्टी लगाना सबसे बड़ी भूल है। ये चीजें वायरस को खत्म नहीं करतीं, बल्कि संक्रमण को और गहरा कर देती हैं।

कई लोग सोचते हैं कि “घर का कुत्ता है, तो वैक्सीन की क्या जरूरत?” याद रखें, कुत्ता घर का हो या बाहर का, डॉक्टर की सलाह और वैक्सीनेशन अनिवार्य है।

रेबीज का वायरस नसों के जरिए दिमाग तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, काटने के 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाना बेहद जरूरी है।

एक या दो इंजेक्शन लगवाकर छोड़ देना खतरनाक है। जब तक कोर्स पूरा नहीं होगा, शरीर में वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित नहीं होगी।

अगर रेबीज के लक्षण (जैसे पानी से डर लगना या व्यवहार में बदलाव) दिखने लगे, तो फिर इंसान को बचाना नामुमकिन हो जाता है। इसलिए लक्षणों का इंतजार न करें, तुरंत इलाज कराएं।

डॉक्टर कैसे करते हैं इलाज?

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर घाव की गहराई (Category I, II, or III) की जांच करते हैं:

एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV): इसका पूरा कोर्स शुरू किया जाता है।

इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG): अगर घाव बहुत गहरा है, तो यह विशेष इंजेक्शन सीधे घाव के आसपास दिया जाता है ताकि वायरस तुरंत बेअसर हो जाए।

टिटनेस: इसके साथ ही टिटनेस का इंजेक्शन भी अनिवार्य रूप से लगाया जाता है।

रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन सही समय पर प्राथमिक उपचार और टीकाकरण से इसे 100% रोका जा सकता है। अपने पालतू जानवरों का समय पर टीकाकरण कराएं और आवारा कुत्तों से उचित दूरी बनाए रखें।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। कुत्ते के काटने की स्थिति में बिना देरी किए तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें।

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