IDFC First Bank घोटाला: हरियाणा विजिलेंस का बड़ा एक्शन, मास्टरमाइंड रिभव ऋषि समेत 4 गिरफ्तार

Lucknow Focus News Desk: हरियाणा विजिलेंस ने IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में हुए 590 करोड़ रुपये के बड़े गबन के मामले में देर रात छापेमारी कर मास्टरमाइंड सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले के उजागर होने के बाद शेयर बाजार में बैंक के शेयरों में भारी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है।
प्रमुख गिरफ्तारियां और आरोपी
विजिलेंस टीम ने घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए निम्नलिखित आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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रिभव ऋषि (मास्टरमाइंड)
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अभय
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स्वाति सिंगला
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अभिषेक सिंगला
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब हरियाणा सरकार से जुड़ी कुछ संस्थाओं ने अपने बैंक खातों की वास्तविक राशि और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज राशि के बीच भारी विसंगति (Mismatch) पाई। शिकायत के बाद हुई जांच में पता चला कि कथित गबन की राशि बैंक की पूरी तिमाही आय से भी अधिक है।
शेयर बाजार पर ‘लोअर सर्किट’ का प्रहार
घोटाले की खबर फैलते ही सोमवार को IDFC First Bank के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई:
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गिरावट: बैंक के शेयर 20% तक टूट गए और लोअर सर्किट को छू लिया।
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मार्केट कैप को नुकसान: निवेशकों की कुल संपत्ति में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
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वैल्यूएशन पर असर: पिछले 3 वर्षों में बैंक का प्राइस-टू-बुक रेशियो (P/B Ratio) 1 से बढ़कर 2 हो गया था, जिसे अब बड़ा झटका लगा है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की चुनौती
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यद्यपि शेयर की कम कीमतें नए निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं, लेकिन यह एक ‘वैल्यूएशन ट्रैप’ भी हो सकता है।
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आरबीएल और इंडसइंड बैंक जैसे पिछले उदाहरणों से पता चलता है कि धोखाधड़ी के बाद निवेशकों का भरोसा वापस पाने और प्रीमियम वैल्यूएशन बहाल करने में बैंकों को लंबा समय लगता है।
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बैंक ने अपना नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 2% से बढ़ाकर 6% किया था, जो अब इस घोटाले के कारण प्रभावित हो सकता है।
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