विशेष

Mother’s Day special: हजारों चेहरों से जीवन ने मिलाया लेकिन न वो खनक देखा…

 

।। मां।।

हजारों चेहरों से जीवन ने मिलाया
लेकिन न वो खनक देखा
ना ही वो रौब
कभी उदास नहीं देखा
कभी घबराए नहीं
कभी ना नहीं सुना
एक लय में, एक ही राग में
जीवन को गुनगुनाते देखा
लिखते बहुत देखा
लेकिन हर बार ओ अपना नाम भूल जाती थी
खैर भूले भी क्यों नहीं,
नहीं सुना उसका नाम
किसी के जुबान से
किसी की मां
किसी की बहूं
किसी की बेटी बन के रही
आज भी उदास चेहरे देख कर ना जाने क्या कहती है तुलसी से,
आज भी जी चाहता है
एक बार सीखूं चलना उसका उंगली पकड़कर
रात में जग के कहूं तोड के खिला दें एक कौर
बहुत थक गया हूं लोरी गा के गोद में सुला दे
कभी तो कहे मैं थक गया हूं बेटा
आज भी रसोई में जाती है बस आखिरी रोटी निकालने को
आज भी सहेज कर रखी है
परम्परा को
स्वाभिमान को
अपनों में अपनी मुस्कान को।

— ‘पवन कुमार पाण्डेय’

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