विभाजन की संस्कृति के खिलाफ एकजुट हुए रचनाकार, लखनऊ में जसम का राज्य सम्मेलन संपन्न

Lucknow Focus News Desk: राजधानी लखनऊ के नेहरू युवा केंद्र में जन संस्कृति मंच (जसम) का दो दिवसीय 10वां राज्य सम्मेलन वैचारिक विमर्श और प्रतिरोध के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन में प्रदेशभर से आए साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और संस्कृति कर्मियों ने वर्तमान सत्ता द्वारा थोपी जा रही ‘विभाजन और दमन की संस्कृति’ के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने का आह्वान किया।
वैचारिक सत्र: “लोकतंत्र आईसीयू में है”
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने देश की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
जाने-माने पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता ने कहा कि देश में ‘क्रोनी पूंजीवाद’ अपने चरम पर है। संसाधनों को चुनिंदा पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है और डिजिटल माध्यमों से नागरिकों की जासूसी हो रही है।
प्रो. अवधेश प्रधान ने ‘सनातन’ की व्याख्या करते हुए कहा कि असली सनातन संस्कृति वह है जो सदा नई होती रहे और जहाँ प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता हो। आज विचार की स्वतंत्रता सबसे बड़े खतरे में है।

शम्सुल इस्लाम ने कहा संस्कृति कर्मी ने ‘वंदे मातरम’ और ‘आनंदमठ’ के ऐतिहासिक संदर्भों पर चर्चा करते हुए सत्ता पक्ष की मंशा पर सवाल उठाए।
प्रो. रूपरेखा वर्मा ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र आज ‘आईसीयू’ में है। अब सिर्फ गोष्ठियों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सड़कों पर उतरकर संघर्ष करना होगा।
एकजुटता का संदेश
सम्मेलन में इप्टा (IPTA), जलेस और प्रलेस जैसे बिरादराना संगठनों ने भी शिरकत की। दीपक कबीर, समीना खान और शकील सिद्दीकी ने कहा कि आज का समय एक-दूसरे का हाथ थामकर दमन के खिलाफ साझा रणनीति बनाने का है।
जसम की नई राज्य कार्यकारिणी का चुनाव
सम्मेलन के दूसरे दिन संगठन को मजबूती देने के लिए नई टीम का चुनाव किया गया।
अध्यक्ष: जयप्रकाश धूमकेतु (संपादक, अभिनव कदम)
कार्यकारी अध्यक्ष: कौशल किशोर (कवि)
सचिव: रामनरेश राम (युवा आलोचक – पुनः निर्वाचित)
उप सचिव: फरजाना महदी (कथाकार)
उपाध्यक्ष: धर्मेंद्र कुमार, हेमंत कुमार, विनोद सिंह, उदय यादव, अशोक चौधरी और निशा।
सह सचिव: दीपशिखा, नगीना निशा और अंकित पाठक।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और फिल्में
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान गीत, नज़्म और फिल्मों का प्रदर्शन भी हुआ। परांजय गुहा ठाकुरता की फिल्म ‘वोट चोरी’ और रोचना कुमार की फिल्म (स्त्री शोषण पर आधारित) विशेष रूप से दिखाई गईं। परिसर में विभिन्न प्रकाशनों के बुक स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।




