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कोल इंडिया का ऐतिहासिक फैसला: अब पड़ोसी देश सीधे खरीद सकेंगे कोयला; ‘बिचौलियों’ का राज खत्म

Lucknow Focus News Desk: भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाया है। 1 जनवरी, 2026 से बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के कोयला उपभोक्ता अब भारतीय बिचौलियों या ट्रेडर्स पर निर्भर रहे बिना सीधे ऑनलाइन कोयला नीलामी में भाग ले सकेंगे।

‘सिंगल विंडो’ प्रणाली से जुड़ा पड़ोसी देशों का बाजार

कोल इंडिया ने अपनी ‘सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक’ (SWMA) ई-नीलामी प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब तक इन पड़ोसी देशों के उद्योगों को भारतीय व्यापारियों के जरिए कोयला खरीदना पड़ता था, जिससे लागत अधिक आती थी। अब विदेशी संस्थाएं सीधे बोली लगाकर कोयला खरीद सकेंगी।

नीलामी प्रक्रिया

पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और ऑनलाइन होगी। नेपाल के खरीदार रुपये या डॉलर में भुगतान कर सकेंगे, जबकि बांग्लादेश और भूटान को अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना होगा। कोयले का निर्यात विशेष रूप से अधिसूचित चैनलों के माध्यम से किया जाएगा ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए।

भारत को क्या होगा लाभ?

कोल इंडिया के इस फैसले के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। जिसमें भारत में उपलब्ध सरप्लस (Surplus) कोयले का सही दाम पर निर्यात कर राजस्व बढ़ाना। बिचौलियों के हटने से बाजार-संचालित कीमतें मिलेंगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय पकड़ को मजबूती मिलना प्रमुख है।

घरेलू जरूरतों का रखा गया ध्यान

कोल इंडिया के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह निर्यात नीति घरेलू कोयला जरूरतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही लागू की गई है। विदेशी खरीदारों के आने से नीलामी में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे कोयले की बेहतर कीमतें प्राप्त होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीधे व्यापार से बांग्लादेश के थर्मल पावर प्लांट और नेपाल के ईंट भट्ठा उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें अब निर्बाध और सस्ती आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

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