पीएम मोदी ने अयोध्या में फहराया ‘धर्मध्वज’, बोले- 1000 साल की नींव करेंगे मजबूत

Lucknow Focus News Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद अयोध्या में एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया और राम मंदिर के मुख्य शिखर पर शुभ मुहूर्त में धर्मध्वज फहराया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र के विकास, मानसिक गुलामी से मुक्ति और भावी पीढ़ियों के लिए मजबूत भारत की नींव रखने पर जोर दिया।
1000 वर्ष के लिए मजबूत नींव का संकल्प
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले 11 वर्षों में महिला, दलित, पिछड़े, आदिवासी, वंचित, किसान और युवा को विकास के केंद्र में रखा है। उन्होंने रामलला प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर राम से राष्ट्र की चर्चा करते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर जोर दिया।
“हमें एक हजार वर्ष के लिए भारत की नींव मजबूत करनी है। जो सिर्फ वर्तमान सोचते हैं, वह आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। जब हम नहीं थे, तब भी देश था। जब हम नहीं रहेंगे तब भी देश रहेगा।”
मैकाले की ‘मानसिक गुलामी’ से मुक्ति
प्रधानमंत्री ने भारत की पीढ़ियों को उसकी गौरवशाली विरासत की जानकारी से वंचित रखने वाली गुलामी की मानसिकता पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज से 190 साल पहले 1835 में लॉर्ड मैकाले ने मानसिक गुलामी की नींव रखी थी, जिसके 200 साल 2035 में पूरे हो रहे हैं।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि इसी गुलामी की मानसिकता ने राम को भी काल्पनिक बता दिया, जबकि भारतवर्ष के कण-कण में भगवान राम हैं। उन्होंने संकल्प लिया कि आने वाले 10 वर्षों में हम इस मानसिक गुलामी की मानसिकता से छुटकारा दिलाकर रहेंगे, ताकि आने वाले एक हजार वर्ष के लिए भारत की नींव मजबूत हो सके। उन्होंने नौसेना के ध्वज से गुलामी के प्रतीक को हटाने और छत्रपति महाराज की विरासत को अपनाने का उदाहरण दिया।
अयोध्या का ‘धर्मध्वज’ और मर्यादा पुरुषोत्तम
पीएम मोदी ने अयोध्या को ऐसी भूमि बताया, जहाँ आदर्श आचरण में बदलते हैं। उन्होंने कहा कि राम ने इसी धरती पर अपना जीवन शुरू किया और यहीं से बताया कि एक व्यक्ति समाज की शक्ति से कैसे मर्यादा पुरुषोत्तम बनता है। मुख्य शिखर पर फहराया गया केसरिया धर्मध्वज, जिस पर कोविदार वृक्ष अंकित है, दूर से ही रामलला की जन्मभूमि का दर्शन कराएगा। यह ध्वज “सत्यमेव जयते” का आह्वान करेगा और हमें याद दिलाएगा कि “प्राण जाए पर वचन नहीं जाए”।
निर्धारित शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री ने जैसे ही राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्मध्वज फहराया, पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूँज उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।




